अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्तों के लिए सीज़फ़ायर यानी युद्ध विराम पर समझौता हो गया है. इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक बड़े मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आया है और उसकी भूमिका को अमेरिका और ईरान दोनों ने सराहा है. हालांकि, लेबनान को इस समझौते में शामिल करने को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि अलग-अलग देशों के इस पर अलग विचार हैं. पाकिस्तान और ईरान का कहना है कि लेबनान भी इस शांति का हिस्सा है, जबकि इसराइल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.

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सीज़फ़ायर को लेकर क्या है पाकिस्तान का रुख और विवाद की वजह?

पाकिस्तान की पूर्व राजदूत Maleeha Lodhi ने बयान दिया है कि पाकिस्तान पूरी तरह से ईरान के उस विचार के साथ है जिसमें लेबनान को भी सीज़फ़ायर में शामिल माना गया है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से पहले अमेरिका की साख दांव पर लगी है. पाकिस्तान इस समय एक मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है और उसने Donald Trump से अपील की है कि वे सुनिश्चित करें कि इसराइल इस शांति प्रक्रिया को नुकसान न पहुँचाए. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी इस समझौते में पाकिस्तान की मदद की बात स्वीकार की है.

इसराइल और अमेरिका का इस मामले पर क्या कहना है?

  • इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है.
  • इसराइल ने कसम खाई है कि वह लेबनान में Hezbollah के ठिकानों पर अपने हमले जारी रखेगा.
  • अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी शुरू में यही कहा कि लेबनान इस समझौते से बाहर है, हालांकि बाद में उन्होंने इसे ईरान की एक गलतफहमी बताया.
  • फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस समझौते का स्वागत किया है लेकिन उन्होंने भी लेबनान को इसमें शामिल करने की गुज़ारिश की है.
  • लेबनान में जारी हमलों के बीच वहां राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है क्योंकि एक ही दिन में 254 लोगों की जान गई है.

सीज़फ़ायर और ताज़ा हालातों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

तारीख मुख्य अपडेट
8 अप्रैल 2026 अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीज़फ़ायर पर सहमति बनी.
9 अप्रैल 2026 Maleeha Lodhi ने लेबनान को समझौते में शामिल होने की बात कही.
9 अप्रैल 2026 Donald Trump ने संकेत दिए कि अमेरिकी सेना ईरान के करीब तैनात रहेगी.
फरवरी से अब तक Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही अभी भी काफी कम और सीमित है.

इस पूरे मामले में अभी भी तनाव बना हुआ है क्योंकि लेबनान में इसराइल की बमबारी रुकी नहीं है. एक तरफ जहाँ राजनयिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ ज़मीनी हालात काफी गंभीर बने हुए हैं. पाकिस्तान की कोशिश है कि वह इस तनाव को कम करने में अपनी मध्यस्थता जारी रखे ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके.