अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब सिर्फ एक विदेशी मामला नहीं रहा बल्कि यह अमेरिका की घरेलू राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बिना कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के लिए गए सैन्य फैसलों ने देश के भीतर असंतोष पैदा कर दिया है। इस युद्ध की वजह से अमेरिका को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है और इसका सीधा असर आम आदमी के जीवन पर महंगाई के रूप में दिख रहा है।

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युद्ध का आर्थिक बोझ और बढ़ती महंगाई

पेंटागन ने ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर से अधिक के फंड की मांग की है। इस भारी खर्च और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से अमेरिका में पेट्रोल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। आम जनता के बीच बढ़ती महंगाई के कारण राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर भी असर पड़ रहा है क्योंकि उनका ‘अमेरिका फर्स्ट’ का वादा अब युद्ध के खर्चों में दबता दिख रहा है।

  • कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं
  • युद्ध पर रोजाना लगभग एक बिलियन डॉलर का खर्च हो रहा है
  • पेंटागन ने 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है
  • कतर के रास लफान गैस हब पर हमले के बाद ट्रंप ने अपनी रणनीति बदली है

कांग्रेस की मंजूरी और खुफिया रिपोर्ट का विवाद

अमेरिकी संविधान के मुताबिक युद्ध घोषित करने की शक्ति कांग्रेस के पास है लेकिन ट्रंप ने इस प्रक्रिया को दरकिनार किया है। हाल ही में खुफिया एजेंसी प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सीनेट के सामने गवाही दी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं कर रहा था, जिसने ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि देश को बिना किसी स्पष्ट जनमत के एक नए और महंगे संघर्ष में झोंक दिया गया है।

अधिकारी या देश महत्वपूर्ण घटना या जानकारी
तुलसी गबार्ड ईरान द्वारा परमाणु हथियार नहीं बनाने की गवाही दी
जो केंट ईरान युद्ध के विरोध में काउंटर-टेररिज्म चीफ पद से इस्तीफा दिया
सऊदी अरब रियाद की ओर दागी गई 4 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया
ओमान दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने वाला था
कतर ईरानी मिसाइल हमले के बाद ईरानी अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया