Arab League का बड़ा बयान, ईरान के हमलों से कतर, सऊदी और UAE में बढ़ा तनाव
अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल-घीत ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के लगातार हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन हैं। 19 मार्च 2026 को जारी एक बयान में उन्होंने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
इन हमलों का खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा है?
हाल के दिनों में खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इससे न केवल स्थानीय संपत्ति को नुकसान हुआ है, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ने का डर है। निम्नलिखित ठिकानों पर हमले या खतरे की बात सामने आई है:
- Qatar: कतर के Ras Laffan Industrial City में कई LNG ठिकानों पर मिसाइल हमले हुए जिससे वहां आग लग गई।
- UAE: अबू धाबी के हबशान गैस सुविधा और बाब फील्ड पर हमले की कुवैत ने कड़ी निंदा की है।
- Kuwait: कुवैत के नेशनल गार्ड ने अपने क्षेत्र में पांच ड्रोनों को मार गिराने की घोषणा की है।
- Saudi Arabia: सऊदी अरब के पेट्रोकेमिकल ठिकानों को भी निशाना बनाने की धमकियां दी गई हैं।
कतर और अन्य देशों ने जवाबी कार्रवाई में क्या किया?
कतर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोहा में ईरानी दूतावास के सैन्य अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। कतर ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसी हरकतें बंद नहीं हुईं तो आगे और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। रियाद में अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने एक बैठक की जिसमें ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की गई है। सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देश अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बिन अहमद अल यामाही ने भी इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सीधा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अरब देशों की सुरक्षा को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां के काम-काज पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।




