बहरीन ने अब तक तबाह किए 141 मिसाइल और 242 ड्रोन, खाड़ी देशों में हाई अलर्ट जारी
बहरीन डिफेंस फोर्स (BDF) ने जानकारी दी है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने अब तक 141 बैलिस्टिक मिसाइलों और 242 ड्रोन (UAV) को मार गिराया है। यह कार्रवाई ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों के जवाब में की गई है। बहरीन की जनरल कमांड के अनुसार उनकी सेना की सतर्कता की वजह से इन हमलों को नाकाम करना संभव हो पाया है। इस तनाव का सीधा असर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर पड़ रहा है जिसे देखते हुए पड़ोसी देशों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हमलों की वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई क्या है?
बहरीन डिफेंस फोर्स ने स्पष्ट किया है कि 20 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मिसाइल और ड्रोन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 19 मार्च तक 134 मिसाइलें और 238 ड्रोन गिराए गए थे। इन हमलों में नागरिक इलाकों और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल का मलबा गिरने से एक गोदाम में आग लगने की घटना भी हुई है जिसे काबू में कर लिया गया है।
खाड़ी के अन्य देशों पर इस संघर्ष का क्या असर हुआ है?
ईरान के इन हमलों का प्रभाव केवल बहरीन तक सीमित नहीं है बल्कि खाड़ी के अन्य देशों में भी हलचल देखी गई है। 20 मार्च को सऊदी अरब ने भी अपनी सीमा की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। वहीं दुबई में एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा आने वाली मिसाइलों को रोकने के दौरान भारी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। इस स्थिति को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
| तारीख | मुख्य घटना |
|---|---|
| 1 मार्च 2026 | अमेरिका और GCC देशों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की |
| 11 मार्च 2026 | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया |
| 18 मार्च 2026 | ईरान ने बहरीन पर अमेरिका और इजरायल को जगह देने का आरोप लगाया |
| 20 मार्च 2026 | ईरानी जनरल अली मोहम्मद नैनी की हवाई हमले में मौत की खबर आई |
ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अपने दुश्मनों की सुरक्षा छीन लेने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन हमलों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बताया है। इस तनाव की वजह से खाड़ी देशों में निर्यात और उत्पादन पर भी आंशिक असर पड़ रहा है।




