बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुललतीफ अल-ज़यानी ने साफ किया है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की तरफ से जो शुरू हुआ था, वह अब पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. 5 अप्रैल 2026 को दिए गए एक बयान में उन्होंने बताया कि ईरान की हरकतों से दुनिया की स्थिरता, खाने-पीने की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सीधा खतरा है. यह मामला अब सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है बल्कि एक वैश्विक संकट में बदल चुका है.

ℹ️: Strait of Hormuz: ईरान ने 15 जहाजों को दी रास्ता पार करने की इजाज़त, भारत और तुर्की के टैंकर भी शामिल, अब देना होगा भारी टैक्स.

क्या है यह विवाद और आम आदमी की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?

ईरान ने हॉर्मुज़ के रास्ते को काफी हद तक ब्लॉक कर दिया है जिससे रोज़ाना लगभग 1.2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुक गई है. बहरीन के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि इस संकट से सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि दुनिया भर में खाद की कमी हो सकती है जिससे अनाज उत्पादन गिरेगा. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि इससे दुनिया भर में 4.5 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं और अरब देशों में 40 लाख लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं. प्रवासियों और आम लोगों के लिए यह महंगाई बढ़ने का सीधा संकेत है.

कुवैत और बहरीन पर हमलों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी

पिछले 24 घंटों के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है. अलग-अलग देशों और संगठनों की तरफ से दी गई जानकारी को नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:

संबंधित पक्ष मुख्य जानकारी और घटनाक्रम
Kuwait 9 बैलिस्टिक मिसाइल, 4 क्रूज मिसाइल और 31 ड्रोन आसमान में ही मार गिराए गए
Bahrain ईरान ने बहरीन के एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर सीधा हमला किया
Donald Trump अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मंगलवार तक रास्ता न खुला तो ईरान के पावर प्लांट तबाह कर देंगे
Iran ईरानी अधिकारियों ने कहा कि नुकसान की भरपाई होने पर ही रास्ता खोला जाएगा
UNSC बहरीन के प्रस्ताव पर रूस और चीन जैसे देशों की वजह से वीटो का खतरा है

बहरीन के राजा हमाद बिन ईसा अल खलीफा ने भी ईरान की इस आक्रामकता की कड़ी निंदा की है, जिसमें आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है. बहरीन इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है और वह इस मुद्दे पर दुनिया भर का समर्थन जुटाने की कोशिश में है. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि इससे यात्रा और रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों पर असर पड़ सकता है.