Bihar Govt New Rule: विदेश जाने वाले कामगारों को अब मिलेगा 4 लाख का मुआवजा, सरकार ने जारी किया नया आदेश
बिहार सरकार ने रोजगार के लिए विदेश जाने वाले कामगारों के लिए कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। राज्य के ‘युवा, रोजगार और कौशल विकास विभाग’ (YESD) ने स्पष्ट किया है कि अब प्रवासियों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। सरकार ने विदेश में काम करने वाले बिहार के लोगों के लिए मुआवजे की राशि को दोगुना कर दिया है और साथ ही विदेश जाने से पहले दी जाने वाली ट्रेनिंग को लेकर भी नियम सख्त कर दिए हैं।
किन शहरों में होगी फ्री ट्रेनिंग?
सरकार ने विदेश जाने वाले कामगारों के लिए ‘Pre-Departure Orientation Training’ (PDOT) अनिवार्य कर दी है। यह ट्रेनिंग बिल्कुल मुफ्त है और बिहार के पांच शहरों में सप्ताह के अलग-अलग दिन दी जा रही है। इसका मकसद मजदूरों को विदेश के कानून और संस्कृति की जानकारी देना है।
- पटना: सब-रिजनल एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज, नियोजन भवन (हर मंगलवार)
- मुजफ्फरपुर: संयुक्त श्रम भवन (हर बुधवार)
- गया: संयुक्त श्रम भवन, कटुरीबाड़ी (हर शुक्रवार)
- दरभंगा: संयुक्त श्रम भवन, रामनगर (हर गुरुवार)
- पश्चिम चंपारण (बेतिया): जिला एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज (हर मंगलवार)
मुआवजा और शव लाने का खर्च उठाएगी सरकार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 6 फरवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके तहत विदेश या राज्य के बाहर काम करने वाले मजदूरों की मृत्यु होने पर अब उनके परिवार को 2 लाख की जगह 4 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, अगर किसी मजदूर की विदेश में मृत्यु हो जाती है, तो उसके शव को पैतृक गांव तक लाने का पूरा खर्च भी अब बिहार सरकार वहन करेगी। यह फैसला गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
ट्रेनिंग के लिए कैसे करें आवेदन?
यह ट्रेनिंग उन लोगों के लिए जरूरी है जो ऐसे देशों में जा रहे हैं जहां ‘इमिग्रेशन क्लीयरेंस’ (ECR) की जरूरत पड़ती है। यह एक दिन की 8 घंटे की क्लास होती है। ट्रेनिंग पूरी तरह से फ्री है और इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जाता। इच्छुक कामगारों को भारत सरकार के पोर्टल pdot.mea.gov.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए पासबुक या जॉब आईडी की जरूरत पड़ती है। सरकार का नारा है ‘सुरक्षित जाएं, प्रशिक्षित जाएं’ ताकि कोई भी मजदूर विदेश में जाकर किसी मुसीबत में न फंसे।




