Bira 91 के 700 कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी, कोर्ट जाने की तैयारी, 50 करोड़ बकाया का है मामला
मशहूर क्राफ्ट बीयर ब्रांड Bira 91 (B9 Beverages) बड़ी मुसीबत में फंस गई है। कंपनी के कर्मचारियों ने अब कोर्ट जाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि 700 से ज्यादा मौजूदा और पुराने कर्मचारियों की सैलरी और पुराने पैसे अभी तक नहीं मिले हैं। यह बकाया राशि करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। 8 मार्च 2026 को कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि लंबी बातचीत के बाद भी हल नहीं निकला, इसलिए अब कानूनी रास्ता ही बचा है।
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क्यों नाराज हैं कर्मचारी और क्या है विवाद?
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के साथ बातचीत करने की बहुत कोशिश की। 1 मार्च 2026 को नई दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में कंपनी के फाउंडर के घर के बाहर ‘साइलेंट प्रोटेस्ट’ भी किया गया था। कर्मचारियों के मुताबिक, कई लोगों को फरवरी 2025 से सैलरी नहीं मिली है। वहीं, यात्रा और दूसरे खर्चों का पैसा (Reimbursement) नवंबर 2024 से अटका हुआ है।
कर्मचारी संघ ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग एजेंसियों को 200 से ज्यादा लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से अब कोर्ट में केस करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
कंपनी की हालत और CEO का जवाब
कंपनी के फाउंडर और CEO अंकुर जैन ने माना है कि कर्मचारी तकलीफ में हैं और उनका गुस्सा जायज है। उन्होंने कहा कि कंपनी नए निवेशकों के साथ डील के आखिरी चरण में है और मार्च 2026 के अंत तक सभी का बकाया चुका दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को वित्त वर्ष 2024 में काफी घाटा हुआ था और रेवेन्यू 30% गिर गया था।
कंपनी के सामने एक बड़ी दिक्कत तब आई जब नाम ‘प्राइवेट लिमिटेड’ से बदलकर ‘लिमिटेड’ किया गया। इस वजह से लाइसेंस दोबारा लेने पड़े और कई महीनों तक बिक्री बंद रही। इससे कंपनी को करीब 80 करोड़ का नुकसान हुआ।
पीएफ और टैक्स को लेकर भी गड़बड़ी
कर्मचारियों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी सैलरी से टैक्स (TDS) और पीएफ (Provident Fund) का पैसा तो काट लिया गया, लेकिन इसे सरकार के पास जमा नहीं कराया गया।
- सैलरी से पैसे कटने के बावजूद सरकारी खाते में जमा नहीं हुए।
- कर्मचारियों को लोन लेने और टैक्स रिटर्न भरने में दिक्कत आ रही है।
- मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम नहीं भरे गए, जिससे बीमार होने पर इलाज में परेशानी हो रही है।
फिलहाल प्रोडक्शन भी मार्च की शुरुआत से काफी हद तक रुका हुआ है और बाजार में माल की कमी देखी जा रही है।




