इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने आगामी केंद्रीय बजट 2026 के लिए वित्त मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत शादीशुदा जोड़ों को एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न (Joint Tax Filing) भरने का विकल्प देने की सिफारिश की गई है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों पर टैक्स का बोझ कम करना है जहां कमाई का जरिया केवल एक सदस्य है या पति-पत्नी की आय में बड़ा असमानता है। अभी यह केवल एक प्रस्ताव है जिस पर सरकार विचार कर सकती है।
क्या है जॉइंट टैक्स फाइलिंग का प्रस्ताव?
वर्तमान में भारत में ‘इंडिविजुअल टैक्सेशन’ यानी व्यक्तिगत कर प्रणाली लागू है, जिसमें पति और पत्नी दोनों को अपनी अलग-अलग आय पर टैक्स देना होता है। ICAI का प्रस्ताव है कि विवाहित जोड़ों को अपनी आय मिलाकर एक साथ टैक्स भरने का विकल्प (Optional) दिया जाए। इस व्यवस्था के तहत, एक परिवार (Household) को एक आर्थिक इकाई माना जाएगा। यदि कोई जोड़ा संयुक्त फाइलिंग चुनता है, तो उनकी बेसिक टैक्स छूट की सीमा को दोगुना किया जा सकता है। यह प्रणाली अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल जैसे देशों में पहले से ही सफल रही है।
एक कमाने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा फायदा
ICAI ने तर्क दिया है कि मौजूदा सिस्टम उन परिवारों के लिए नुकसानदेह है जहां केवल एक व्यक्ति कमाता है (Single-earner families)। उदाहरण के लिए, नई टैक्स रिजीम में एक व्यक्ति को 4 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। अगर पति कमाता है और पत्नी नहीं, तो पत्नी के हिस्से की 4 लाख रुपये की छूट बेकार चली जाती है। संयुक्त फाइलिंग में यह सीमा जुड़कर 8 लाख रुपये तक हो सकती है, जिससे परिवार की कुल टैक्स देनदारी काफी कम हो जाएगी। यह उन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी जो एक ही आय पर निर्भर हैं।
प्रस्तावित टैक्स स्लैब और दरें
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि संयुक्त आय पर टैक्स स्लैब को चौड़ा किया जाना चाहिए ताकि उच्च कर दरों का असर कम हो सके। टैक्स विशेषज्ञ सीए सुरेश सुराणा ने एक मॉडल सुझाया है जिसमें 48 लाख रुपये से ऊपर की आय पर ही 30% टैक्स लगाने की बात कही गई है। उनके द्वारा प्रस्तावित स्लैब का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| कुल संयुक्त आय (Total Joint Income) | टैक्स की दर (Tax Rate) |
|---|---|
| 8,00,000 रुपये तक | शून्य (Nil) |
| 8,00,001 से 16,00,000 रुपये तक | 5% |
| 16,00,001 से 24,00,000 रुपये तक | 10% |
| 24,00,001 से 32,00,000 रुपये तक | 15% |
| 32,00,001 से 40,00,000 रुपये तक | 20% |
| 40,00,001 से 48,00,000 रुपये तक | 25% |
| 48,00,000 रुपये से अधिक | 30% |
विशेषज्ञों की राय और तकनीकी चुनौतियां
स्टेलर इनोवेशन के उपाध्यक्ष कार्तिक नारायण का मानना है कि 2026 के बजट में इस विचार पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आज के समय में दोहरी आय वाले परिवारों और पारिवारिक व्यवसायों के लिए यह एक समयोचित कदम है। हालांकि, इसे लागू करने में कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं। भारत का टैक्स ढांचा पूरी तरह से व्यक्तिगत पैन (PAN) कार्ड और टीडीएस (TDS) सिस्टम पर आधारित है। संयुक्त फाइलिंग को लागू करने के लिए सरकार को अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि राजस्व का नुकसान न हो और नियमों का सही पालन हो सके।
क्या यह सभी के लिए अनिवार्य होगा?
नहीं, ICAI ने स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) होनी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ मामलों में, विशेषकर जहां पति और पत्नी दोनों की आय बहुत अधिक है (High-income couples), उनकी आय जुड़ने से वे ऊंचे टैक्स स्लैब में आ सकते हैं और उन्हें नुकसान हो सकता है। इसलिए, करदाताओं को यह चुनने की आजादी होगी कि वे अलग-अलग रिटर्न भरना चाहते हैं या संयुक्त रूप से, जो भी उनके लिए अधिक फायदेमंद हो। इससे होम लोन और अन्य कटौतियों का क्लेम करना भी आसान हो जाएगा और कागजी कार्रवाई कम होगी।
Last Updated: 16 January 2026





