खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल के दाम फिर से बढ़ने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद तेल की सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों का आना-जाना बंद होने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। तेल की इस कमी का सीधा असर आने वाले समय में दुनिया भर के पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।

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तेल की सप्लाई में क्यों आ रही है बड़ी रुकावट?

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्धविराम की बात तो हुई थी, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। इजरायल द्वारा लेबनान में हमले जारी रखने की वजह से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। ईरान के समुद्री संगठन ने साफ किया है कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को सैन्य समन्वय और कड़े नियमों का पालन करना होगा।

इसके अलावा ईरान ने एक नई योजना बनाई है जिसके तहत वहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का टोल टैक्स लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि यह भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में मांगा जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बचा जा सके। सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी देशों की पाइपलाइनों पर हुए हमलों ने भी सप्लाई चैन को काफी नुकसान पहुंचाया है।

बाजार और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बताया है कि बाजार को सामान्य स्थिति में लाने के लिए होर्मुज का रास्ता खुलना सबसे जरूरी है। फिलहाल करीब 90 लाख बैरल रोजाना का तेल उत्पादन बाजार से बाहर है, जिसकी भरपाई 2026 के अंत तक ही होने की उम्मीद जताई जा रही है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में बदलाव से वहां की अर्थव्यवस्था और ट्रांसपोर्ट के खर्चों पर सीधा असर पड़ता है।

मुख्य बिंदु ताजा जानकारी
सप्लाई में कमी 90 लाख बैरल प्रति दिन तेल बाजार से बाहर है
होर्मुज टोल टैक्स ईरान 1 डॉलर प्रति बैरल टैक्स लगाने की तैयारी में है
OPEC+ फैसला अप्रैल से उत्पादन में 2,06,000 बैरल की मामूली बढ़ोतरी होगी
रिकवरी का अनुमान 2026 के अंत तक ही सप्लाई पूरी तरह बहाल हो पाएगी