सऊदी न्यूज़ का बड़ा अपडेट, कच्चे तेल की कीमत 106 डॉलर के पार, जानिए क्या है पूरा मामला
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल देखने को मिला है। सऊदी अरब के आधिकारिक न्यूज़ चैनल के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ग्लोबल सप्लाई में आ रही रुकावटों और मध्य पूर्व (Middle East) के वर्तमान हालातों के कारण यह तेजी आई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई रुक गई है।
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कच्चे तेल की कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी
फरवरी 2026 के अंत से लेकर अब तक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम में लगभग 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 18 मार्च 2026 को इसकी कीमत 106.50 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। वहीं अमेरिका का कच्चा तेल (WTI) भी 100 डॉलर के करीब पहुंच गया है, जो साल 2022 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। अमेरिका में भी गैसोलीन के दाम में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सऊदी अरामको ने भी मार्च के लिए अपने रेट में बदलाव किए हैं।
बाजार को संभालने के लिए क्या हो रहे हैं उपाय
ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को संतुलित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। G7 देश और IEA के सदस्य देशों ने मिलकर अपने सरकारी रिजर्व से 271 मिलियन बैरल तेल निकालने का फैसला किया है। इसके साथ ही इराक ने तुर्की के रास्ते अपना तेल निर्यात फिर से शुरू करने के लिए एक नया समझौता किया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि जैसे ही समुद्री रास्तों की सुरक्षा बहाल होगी, कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आ जाएंगे।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर
तेल के दाम बढ़ने से दुनिया भर के देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर कच्चे तेल की कीमत 30 दिनों से ज्यादा समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहती है, तो कई एशियाई और यूरोपीय देशों में ईंधन की राशनिंग (Fuel Rationing) शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
- जापान और चीन के कई बड़े बैंक मध्य पूर्व के एनर्जी प्रोजेक्ट्स को लोन देने से कतरा रहे हैं।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और खाने-पीने की चीजों पर पड़ेगा।
- खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
- सऊदी अरब का ऊर्जा मंत्रालय हालात और इंफ्रास्ट्रक्चर की लगातार निगरानी कर रहा है।




