साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला, ब्रिटेन ने स्पष्ट किया- ईरान से नहीं आया था ड्रोन
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने साइप्रस में अपने सैन्य बेस RAF Akrotiri पर हुए ड्रोन हमले को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार 2 मार्च 2026 की आधी रात को बेस पर हमला करने वाला ड्रोन ईरान से नहीं भेजा गया था। इस घटना के बाद ब्रिटिश एयरफोर्स के फाइटर जेट और नेवी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गनीमत रही कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई और बेस के रनवे को केवल मामूली नुकसान पहुंचा है।
हमले की मुख्य जानकारी और मौजूदा स्थिति क्या है?
यह हमला सोमवार 2 मार्च को स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 12 बजे हुआ था। इसमें एक Shahed जैसा दिखने वाला ड्रोन सीधे ब्रिटिश बेस से टकराया था। इसके अगले दिन यानी 3 मार्च की सुबह दो और ड्रोन बेस की तरफ आ रहे थे जिन्हें रास्ते में ही मार गिराया गया। रक्षा सचिव जॉन हीली ने पुष्टि की है कि हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। सुरक्षा को देखते हुए बेस पर मौजूद गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को पास के सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।
सुरक्षा को लेकर क्या नए कदम उठाए गए हैं?
- एयर डिफेंस: ब्रिटेन ने अपने सभी सैन्य अड्डों पर एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की नई सप्लाई भेज दी है।
- नेवी की तैनाती: रॉयल नेवी के Wildcat हेलीकॉप्टर जल्द ही साइप्रस पहुंचेंगे जो हवाई खतरों से निपटने में सक्षम हैं।
- हवाई गश्त: RAF के Typhoon और F-35B फाइटर जेट लगातार इलाके में निगरानी और सुरक्षा के लिए उड़ान भर रहे हैं।
- यात्रा सलाह: ब्रिटेन के विदेश विभाग ने साइप्रस की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
- ड्रोन पर पाबंदी: साइप्रस सरकार जल्द ही आम लोगों द्वारा ड्रोन उड़ाने पर रोक लगाने वाला आदेश जारी कर सकती है ताकि रडार सिस्टम में कोई रुकावट न आए।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्रोन लेबनान की तरफ से Hezbollah द्वारा छोड़ा गया हो सकता है। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने साफ किया है कि उनका देश किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं है और यह हमला सीधे तौर पर ब्रिटिश बेस को निशाना बनाकर किया गया था। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और यात्रियों की चिंता बढ़ गई है।




