दुबई और अन्य खाड़ी (GCC) देशों में ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। 31 मार्च 2026 को दुबई के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़े धमाकों की आवाज सुनी गई। यूएई (UAE) के एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई की है। सरकार ने आम जनता और प्रवासियों से शांत रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

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दुबई में सुरक्षा के ताज़ा हालात क्या हैं?

दुबई प्रशासन ने पुष्टि की है कि शहर के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव है और दुश्मन के खतरों को लगातार नाकाम कर रहा है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि धमाकों की आवाज मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की वजह से आई थी। हालांकि, दक्षिणी दुबई के रिहायशी इलाके में एक नष्ट किए गए ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ घरों को नुकसान पहुंचा है। इस घटना में चार एशियाई नागरिकों को मामूली चोटें आई हैं जिनका इलाज किया जा रहा है।

  • दुबई के आसमान में सुबह के समय धमाके सुने गए।
  • UAE Ministry of Defence ने कहा है कि वे देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार हैं।
  • सोशल मीडिया पर किसी भी अफवाह या वीडियो को साझा करने से बचने की सलाह दी गई है।
  • एयरपोर्ट और अन्य जरूरी सेवाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

खाड़ी देशों और समुद्री व्यापार पर क्या असर पड़ा?

ईरान की ओर से जारी इन हमलों का असर केवल दुबई तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब, बहरीन और कतर ने भी रात के समय कई हमलों को रोकने की जानकारी दी है। समुद्र में भी व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। दुबई के पास कुवैत के एक तेल टैंकर Al Salmi पर ड्रोन हमला हुआ जिससे जहाज में आग लग गई थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि आग बुझा ली गई और तेल का रिसाव नहीं हुआ।

तारीख बैलिस्टिक मिसाइलें रोकी गईं ड्रोन हमले नाकाम किए
29 मार्च 2026 16 42
30 मार्च 2026 11 27
कुल (28 Feb से अब तक) 414 1914

प्रवासियों और यात्रियों के लिए क्या है सलाह?

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। दुबई प्रशासन और National Emergency Crisis Management Authority ने साफ किया है कि सुरक्षा एजेंसियां हर स्थिति पर नजर रख रही हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा से पहले संबंधित विभाग की वेबसाइट चेक करते रहें। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि ये हमले अमेरिकी ठिकानों के लिए थे, लेकिन खाड़ी देशों ने इसे अपनी सुरक्षा पर बड़ा खतरा बताया है और जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा है।