दुबई में रमजान से पहले 1856 कैदियों को मिली आज़ादी, शासक का बड़ा फैसला
दुबई के शासक, महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने रमजान के पवित्र महीने के आगमन पर एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। उन्होंने दुबई की सुधार और दंडात्मक सुविधाओं से 1,856 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश 18 फरवरी, 2026 को जारी किया गया, जिससे कई राष्ट्रीयताओं के कैदियों को एक नई शुरुआत का मौका मिलेगा। दुबई लोक अभियोजन और दुबई पुलिस ने कैदियों की रिहाई की कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं, ताकि वे रमजान की शुरुआत से पहले अपने परिवारों से मिल सकें।
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दुबई के शासक का यह आदेश क्या है?
महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम, जो संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधान मंत्री होने के साथ-साथ दुबई के शासक भी हैं, उन्होंने रमजान के आगमन पर 1,856 कैदियों की रिहाई का निर्देश दिया है। यह फैसला दुबई की विभिन्न सुधार और दंडात्मक सुविधाओं से कैदियों को आज़ादी देगा। रिहा किए जाने वाले कैदी अलग-अलग राष्ट्रीयताओं से संबंध रखते हैं, जिससे कई परिवारों में खुशी लौटेगी।
किन कैदियों को मिली रिहाई और इसके नियम क्या हैं?
इस मानवीय पहल के तहत 1,856 कैदियों को रिहा किया जाएगा। हालांकि, सभी कैदी इस छूट के पात्र नहीं होते। आमतौर पर, ऐसे कैदियों को चुना जाता है जिनका व्यवहार अच्छा रहा हो और जिन्होंने अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया हो। गंभीर अपराधों जैसे आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले या कुछ हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों को इस आदेश में शामिल नहीं किया जाता। दुबई लोक अभियोजन और दुबई पुलिस इस प्रक्रिया को सुनिश्चित कर रहे हैं।
रमजान से पहले कैदियों की रिहाई का क्या महत्व है?
यूएई में हर साल महत्वपूर्ण अवसरों पर कैदियों को क्षमादान देने की परंपरा रही है, खासकर रमजान जैसे पवित्र महीने में। यह परंपरा समाज में मेलजोल को बढ़ावा देती है और पात्र व्यक्तियों को एक ‘दूसरा मौका’ देती है। इस फैसले से कैदियों को नए सिरे से जीवन शुरू करने और समाज में फिर से शामिल होने का अवसर मिलेगा। हाल ही में, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भी 735 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था और उनके वित्तीय दायित्वों को निपटाने का संकल्प लिया था।




