पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिंगापुर और कुवैत के अपने समकक्षों से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य मकसद वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पूरे इलाके में शांति बनाए रखना था।

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पश्चिम एशिया में क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ी चिंता

अमेरिका ने Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) पर नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है। इसके बाद UKMTO ने समुद्री रास्तों पर कई पाबंदियां लगाई हैं। इसका सीधा असर ईरान के बंदरगाहों, अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के इलाकों पर पड़ रहा है। इस तनाव की वजह से व्यापारिक रास्तों और तेल की सप्लाई बाधित होने का डर है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और भारत का क्या है स्टैंड

भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और कुशलता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बातचीत के दौरान तीन मुख्य बातों पर जोर दिया:

  • इलाके में शांति, संयम और बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाना।
  • वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी भलाई सुनिश्चित करना।
  • भारत के राष्ट्रीय हितों, जैसे कि तेल की सप्लाई और व्यापारिक रास्तों की रक्षा करना।

किन देशों के साथ हुई बातचीत और क्या रही चर्चा

13 अप्रैल 2026 को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan और कुवैत के विदेश मंत्री Jarrah Jaber Al-Ahmad Al-Sabah से अलग-अलग फोन पर चर्चा की। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर पुष्टि की है कि यह बातचीत क्षेत्रीय घटनाओं और उन्हें सुलझाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर केंद्रित थी।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com