ईरान और इज़राइल युद्ध के बीच यूरोपीय संघ का बड़ा बयान, खाड़ी देशों के साथ खड़े होने का किया वादा
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने खाड़ी देशों के साथ यूरोपीय संघ की एकजुटता को फिर से दोहराया है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने को कहा है। यह बयान ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में किए गए हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद आया है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खाड़ी देशों के लिए यूरोपीय संघ का नया संदेश
एंटोनियो कोस्टा ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर विशेष चर्चा की और उन्हें समर्थन का पूरा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाकों और आम लोगों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। यूरोपीय संघ का मानना है कि इस पूरे मामले को कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जा सकता है ताकि मिडिल ईस्ट में सुरक्षा बनी रहे। कोस्टा ने यह भी साफ किया कि यूरोप को इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहिए और अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
क्षेत्र में मौजूदा स्थिति और अन्य देशों के कदम
पिछले 24 घंटों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय रखा है क्योंकि कई जगहों पर मिसाइल अलर्ट जारी किए गए थे। कतर ने भी ईरान की तरफ से आए एक ड्रोन हमले को बीच में ही सफलतापूर्वक रोक दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न देशों की स्थिति कुछ इस प्रकार रही है:
| देश/संस्था | प्रमुख प्रतिक्रिया |
|---|---|
| European Union | शांति की अपील की और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर ज़ोर दिया। |
| UAE, Kuwait, Bahrain | सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए। |
| France & UK | शुरुआती हमलों से दूरी बनाई लेकिन ईरान की कार्रवाई की निंदा की। |
| Spain | अमेरिकी हमलों को गलत बताया और सैन्य अड्डों के उपयोग से मना किया। |
इस बीच तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद में बैठक कर रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता कराने की कोशिश करना है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां की सुरक्षा और उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।




