फ्रांस में G7 की बैठक: सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने लिया ग्रुप फोटो
फ्रांस के वॉक्स-डी-सर्ने (Vaux-de-Cernay) में चल रही G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान शामिल हुए। 26 और 27 मार्च 2026 को हो रही इस महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया भर के कई देशों के विदेश मंत्री मौजूद हैं। इस दौरान, प्रिंस फैसल बिन फरहान ने G7 विदेश मंत्रियों और आमंत्रित साझेदारों के साथ एक ग्रुप फोटो में भी हिस्सा लिया। यह बैठक कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई है।
इस बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
इस G7 बैठक में कई अंतरराष्ट्रीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर खुलकर बात हुई। इसमें वैश्विक शासन सुधार, पुनर्निर्माण के मुद्दे, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर खास ध्यान दिया गया। मंत्रियों ने ईरान और यूक्रेन से जुड़े संघर्षों के कारण बढ़ रही भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा की। वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने, रूस पर प्रतिबंधों को जारी रखने और अमेरिका की विदेश नीति में बदलावों पर भी बातचीत हुई। यूरोपीय नेताओं ने ईरान संघर्ष को कम करने पर जोर दिया ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
G7 बैठक में कौन-कौन से देश शामिल हुए?
इस बैठक में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूके के विदेश मंत्री शामिल हुए। फ्रांस ने इस साल G7 की अध्यक्षता की है और उसने सऊदी अरब, भारत, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देशों को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा (Andriy Sybiha) भी इस बैठक में मौजूद थे। सऊदी अरब का प्रतिनिधित्व प्रिंस फैसल बिन फरहान, फ्रांस में सऊदी राजदूत फहद अल-रूवैली (Fahad Al-Ruwaily) और विदेश मंत्री कार्यालय के महानिदेशक वालिद अल-इस्माइल (Waleed Al-Ismail) ने किया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इसमें भाग लिया और ग्लोबल साउथ (Global South) की ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उठाया।
सऊदी अरब की क्या रही भूमिका?
सऊदी अरब को G7 मंत्रिस्तरीय बैठक में एक “आमंत्रित देश” के तौर पर बुलाया गया था। फ्रांस, जो इस समय G7 का अध्यक्ष है, ने सऊदी अरब को यह निमंत्रण दिया। प्रिंस फैसल बिन फरहान ने 25 मार्च 2026 को फ्रांस पहुंचकर इस महत्वपूर्ण बैठक में सऊदी अरब का प्रतिनिधित्व किया। उनकी उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में सऊदी अरब की भूमिका को मजबूत करती है।




