France Military Update: फ्रांस के राष्ट्रपति का ऐलान, मिडिल ईस्ट में तैनात करेंगे दो हेलीकॉप्टर कैरियर और युद्धपोत
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 9 मार्च 2026 को साइप्रस के पाफोस शहर से एक बड़ा ऐलान किया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा तनाव को देखते हुए फ्रांस अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा रहा है. इस तैनाती का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित करना और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को फिर से सुचारू बनाना है. मैक्रों ने साफ किया है कि यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक होगा. इसका सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापार पर पड़ेगा, क्योंकि इससे तेल और गैस की सप्लाई चेन फिर से सुरक्षित हो सकेगी.
फ्रांस की इस तैनाती में क्या-क्या शामिल है?
फ्रांस ने मिडिल ईस्ट में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपने कई बड़े समुद्री बेड़े भेजे हैं. इस मिशन में फ्रांस का सबसे प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर ‘Charles de Gaulle’ शामिल है, जो फिलहाल पूर्वी भूमध्य सागर में क्रेते तट के पास तैनात है. इसके अलावा कई और ताकतवर युद्धपोत इस बेड़े का हिस्सा हैं.
- 1 एयरक्राफ्ट कैरियर: परमाणु ऊर्जा से चलने वाला Charles de Gaulle.
- 2 हेलीकॉप्टर कैरियर: मिस्ट्रल-क्लास के बड़े जहाज.
- 8 फ्रिगेट्स (युद्धपोत): इनमें Languedoc, L’Amiral Ronarc’h, Alsace और Chevalier Paul जैसे नाम शामिल हैं.
- 1 सपोर्ट शिप: तेल और रसद पहुंचाने के लिए Jacques Chevallier.
खाड़ी देशों के साथ फ्रांस का तालमेल
इस मिशन के तहत फ्रांस मिडिल ईस्ट के प्रमुख देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है. फ्रांस ने सऊदी अरब, UAE, कतर और जॉर्डन के साथ समन्वय की पुष्टि की है. इसका उद्देश्य इन देशों के हवाई क्षेत्र और जमीनी इलाकों की रक्षा करना है. हाल ही में फ्रांस की सेना ने अपने सहयोगियों के हवाई क्षेत्र में ड्रोन को मार गिराने में भी मदद की है, जिसमें UAE और साइप्रस शामिल हैं. इसके अलावा फ्रांस यूरोपीय संघ के ‘ऑपरेशन एस्पाइड्स’ में अपने दो फ्रिगेट्स के साथ लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा करेगा.
यह कदम क्यों उठाया गया?
फरवरी 2026 के अंत से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है. इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को कमर्शियल जहाजों के लिए बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया. फ्रांस के इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल और कंटेनर जहाजों को एस्कॉर्ट करना है ताकि ग्लोबल मार्केट में स्थिरता आ सके. फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि साइप्रस पर कोई भी हमला पूरे यूरोप पर हमला माना जाएगा.




