Galgotias University की मैडम Neha Singh अब LinkedIn पर खोज रही नौकरी, बिजली काट के स्टाल सरकार ने कराया Ai Summit से ख़ाली
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 कोई साधारण टेक इवेंट नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक AI लीडर्स शामिल हुए — यह ग्लोबल साउथ में अब तक आयोजित सबसे बड़ी AI समिट बन गई। देशभर की यूनिवर्सिटीज़, स्टार्टअप्स और संस्थानों ने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने के लिए स्टॉल लगाए।
उन्हीं में से एक था ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University का स्टॉल। उनके प्रदर्शन में एक चमकदार, चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग था जिसे उन्होंने “ओरियन” नाम दिया था। इसे यूनिवर्सिटी के ₹350 करोड़ के AI निवेश और Centre of Excellence कार्यक्रम से जोड़कर पेश किया गया।
वह वीडियो जिसने सब बदल दिया
इवेंट का एक वीडियो क्लिप तेज़ी से वायरल हो गया। उसमें एक महिला — जिनकी पहचान बाद में यूनिवर्सिटी के School of Management में कम्युनिकेशन की प्रोफेसर नेहा सिंह के रूप में हुई — ओरियन को मीडिया के सामने बड़े आत्मविश्वास से पेश कर रही थीं।
उन्होंने इस रोबोट को यूनिवर्सिटी के Centre of Excellence द्वारा विकसित बताया और कहा कि यह निगरानी और कठिन इलाकों में नेविगेशन के लिए सक्षम एक अत्याधुनिक मशीन है।
समस्या? तकनीक की जानकारी रखने वाले दर्शकों ने उसी रोबोट को तुरंत पहचान लिया।
“ओरियन” असल में ₹2.5 लाख का चीनी प्रोडक्ट निकला
वह रोबोट दरअसल Unitree Go2 था — चीनी रोबोटिक्स कंपनी Unitree Robotics का एक commercially available मॉडल, जो भारत में ₹2 लाख से ₹3 लाख के बीच ऑनलाइन उपलब्ध है। बताया गया कि प्रदर्शन के समय रोबोट पर चीनी ब्रांडिंग भी दिख रही थी।
संक्षेप में — एक ऐसा प्रोडक्ट जिसे कोई भी ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है, उसे एक भारतीय नाम “ओरियन” देकर देश के प्रमुख AI समिट में स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश किया जा रहा था।
सोशल मीडिया पर तूफान आ गया।
नतीजे: स्टॉल खाली, बिजली कटी, सार्वजनिक माफी
परिणाम बेहद तेज़ी से सामने आए। सोशल मीडिया पर जबरदस्त बैकलैश के बाद Galgotias University को भारत मंडपम में अपना प्रदर्शनी स्टॉल खाली करने पर मजबूर होना पड़ा। MeitY के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि मुख्य समस्या यह थी कि जनता को तब गुमराह किया गया “जब पूरी दुनिया देख रही है।”
IT सचिव कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसे प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं करेगी जो मूल आविष्कार के रूप में पेश किए जाएं। उन्होंने कहा, “अगर आप गुमराह करते हैं… हम नहीं चाहते कि कोई विवादित संस्था ऐसी चीज़ प्रदर्शित करे जो उनकी है ही नहीं।”
रिपोर्ट्स के अनुसार Galgotias पैविलियन की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी का स्टाफ चुपचाप स्टॉल खाली करता रहा — पत्रकारों के सवालों से बचते हुए।
प्रोफेसर नेहा सिंह: “इसे गलत समझा गया”
विवाद बढ़ने पर नेहा सिंह ने सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी रोबोट को यूनिवर्सिटी का अपना नहीं बताया। उनके अनुसार: “हमने कभी नहीं कहा कि यह हमारा है, भारतीय है, या गैलगोशियन है। एक गलतफहमी से इंटरनेट पर तूफान आ गया। हो सकता है कि मैं जो कहना चाहती थी, वह ठीक से कह नहीं पाई, या उसे गलत समझा गया। मैं School of Management में कम्युनिकेशन की फैकल्टी हूँ, AI की नहीं।”
हालाँकि उनकी यह सफाई आलोचकों को संतुष्ट नहीं कर सकी — खासकर इसलिए क्योंकि वायरल वीडियो में वे साफ तौर पर कह रही थीं कि रोबोट Centre of Excellence द्वारा “विकसित” किया गया है।
LinkedIn वाला मोड़: “Open to Work”
इस पूरे प्रकरण में एक नाटकीय अंत जुड़ गया — नेहा सिंह के LinkedIn प्रोफाइल पर “Open to Work” का बैनर दिखने लगा। LinkedIn पर यह संकेत आमतौर पर वे लोग लगाते हैं जो नौकरी की तलाश में होते हैं।
उनका LinkedIn बायो, जो अब भी सार्वजनिक है, इस पूरे विवाद के संदर्भ में खासा विडंबनापूर्ण लगता है:
“भाषा पर अपनी पकड़ से जोड़ने, प्रेरित करने और दूसरों को ऊपर उठाने की क्षमता रखती हूँ। भाषा, अभिव्यक्ति और मंच पर स्वाभाविक प्रभाव के साथ, मैंने वर्षों तक लोगों को अपनी आवाज़ पहचानने और स्पष्टता के साथ खुद को व्यक्त करने में मदद की है। मेरा मानना है कि सही समय पर सही शब्द वाकई सब कुछ बदल सकते हैं।” (https://www.linkedin.com/in/neha-singh-565b2b1ab/)

यूनिवर्सिटी का बचाव — और दूसरा विवाद
Galgotias University ने पूरे दिन में कई बयान जारी किए। औपचारिक माफी में यूनिवर्सिटी ने कहा: “पैविलियन संभाल रहे हमारे एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वह प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति से अनजान थीं और कैमरे के सामने उत्साह में आकर तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था।”
इससे पहले एक अन्य बयान में यूनिवर्सिटी ने इस बैकलैश को अपने खिलाफ “प्रोपेगैंडा अभियान” बताया था। बयान में लिखा था: “हम गैलगोशियंस — फैकल्टी और छात्र — अपनी यूनिवर्सिटी के खिलाफ चल रहे प्रोपेगैंडा अभियान से गहरे आहत हैं।”
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। नेटिज़न्स ने Galgotias के स्टॉल पर प्रदर्शित एक ड्रोन की भी पहचान Striker V3 ARF के रूप में की — जो दक्षिण कोरियाई कंपनी Helsel Group का एक commercially available प्रोडक्ट है, जिसे ड्रोन स्पोर्ट्स के लिए बनाया गया है। इसे भी “खुद से बनाया गया” बताए जाने के दावों पर सवाल उठे।
सरकार ने क्या कहा?
MeitY के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार का इरादा नवाचार को दबाना नहीं है, लेकिन प्रतिनिधित्व भ्रामक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विवाद “उन लोगों की मेहनत पर ग्रहण नहीं लगना चाहिए जिन्होंने वास्तव में कुछ किया है।”
बड़ा सवाल: नवाचार बनाम नकल
इस घटना ने एक बड़ी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है — कि शैक्षणिक संस्थान बड़े आयोजनों में खुद को कैसे पेश करते हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी globally available टूल को शिक्षा के लिए इस्तेमाल करने और उसे स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश करने के बीच की रेखा केवल नैतिक नहीं — बल्कि राष्ट्रीय विश्वसनीयता का भी सवाल है।
Galgotias के समर्थकों का तर्क है कि दुनियाभर की यूनिवर्सिटीज़ छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए commercially available हार्डवेयर का उपयोग करती हैं। विवाद, उनके अनुसार, जानबूझकर धोखे से नहीं बल्कि कमज़ोर संवाद से हुआ।
लेकिन एक ऐसे आयोजन में — जो भारत की AI महत्वाकांक्षाओं को दुनिया के सामने दिखाने के लिए बना था — यह नज़ारा बेहद नुकसानदेह रहा।
एक और बात: IndiaAI Expo को भारी प्रतिक्रिया के कारण 21 फरवरी तक एक दिन बढ़ा दिया गया है — हालाँकि VVIP ऑडिट के लिए 19 फरवरी को यह बंद रहेगा।
सार यह है: ओरियन का जन्म ग्रेटर नोएडा में नहीं हुआ था। इसे चीन में बनाया गया था, लगभग ₹2.5 लाख में खरीदा गया था, और इसने भारत की सबसे बड़ी AI समिट के सबसे चर्चित विवाद को जन्म दिया। चाहे यह संवाद की विफलता हो या कुछ और — यह घटना एक कड़ी याद दिलाती है: वायरल वीडियो और तत्काल फैक्ट-चेकिंग के इस युग में, सही शब्द — और सही श्रेय — वाकई सब कुछ बदल देते हैं।




