गाजा में भारी बारिश से टेंटों में घुसा गंदा पानी, बीमारियों के खतरे के बीच 72 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत
गज़ा में जारी संघर्ष के बीच अब मौसम की मार ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। 26 मार्च 2026 को हुई भारी बारिश की वजह से विस्थापित फिलिस्तीनियों के कैंपों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बारिश का पानी सीवेज के साथ मिल गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। पूरे क्षेत्र का बुनियादी ढांचा तबाह होने के कारण जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं बची है।
बाढ़ और बारिश से गज़ा में क्या हुए नुकसान?
भारी बारिश और तेज़ हवाओं के कारण गज़ा के विस्थापन केंद्रों में स्थिति बहुत खराब हो गई है। सैकड़ों परिवार अपने टेंटों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण वे बेबस हैं।
- दीवार गिरने से हादसा: गज़ा शहर की Al-Wahda Street पर तेज़ हवाओं के कारण एक दीवार टेंटों पर गिर गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
- कैंपों की हालत: जलभराव के कारण पूरे कैंप कीचड़ और पानी के तालाब में बदल गए हैं, जिससे लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है।
- सीवेज की समस्या: गज़ा का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुका है, जिससे गंदा पानी घरों और टेंटों के अंदर घुस रहा है।
- विस्थापन: करीब 19 लाख लोग इस समय बेहद खराब हालात में रहने को मजबूर हैं, जहाँ खाना और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
गज़ा में मौतों और स्वास्थ्य संकट का ताजा आंकड़ा
गज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। पिछले कुछ महीनों में मौतों का आंकड़ा तेज़ी से बढ़ा है और अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
| विषय | विवरण (26 मार्च 2026 तक) |
|---|---|
| कुल मौतों की संख्या | 72,267 (अक्टूबर 2023 से अब तक) |
| ज़रूरी दवाइयों की कमी | 46% दवाइयां स्टॉक से बाहर हैं |
| बाढ़ के खतरे वाली साइट्स | 912 साइट्स बाढ़ के जोखिम वाले क्षेत्र में हैं |
| मेडिकल सामान की कमी | 66% मेडिकल कंज्यूमेबल्स खत्म हो चुके हैं |
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, गज़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। फरवरी के अंत से मेडिकल निकासी भी बंद है, जिससे गंभीर मरीज़ों का इलाज नहीं हो पा रहा है। UNRWA ने बताया है कि मार्च के मध्य में आए रेतीले तूफान और अब भारी बारिश ने अस्थायी घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है, और करीब दस लाख बच्चों को तुरंत मदद की आवश्यकता है।




