खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जसेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान की ओर से हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि खाड़ी देश अब और हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाएंगे। फरवरी के आखिर से शुरू हुए इन हमलों में अब तक 5000 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे जा चुके हैं, जिससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। कुवैत, सऊदी अरब और यूएई समेत सभी छह खाड़ी देशों को निशाना बनाया गया है।

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हमले में अब तक क्या-क्या हुआ और कितना नुकसान हुआ?

ईरान की ओर से किए गए इन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है। सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक हुए नुकसान की जानकारी नीचे दी गई है:

  • हमलों की शुरुआत: यह सिलसिला 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ और मार्च के आखिर तक जारी है।
  • मिसाइल और ड्रोन: अब तक 5000 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन खाड़ी देशों की ओर छोड़े गए हैं।
  • जानी नुकसान: इन हमलों में अब तक 11 लोगों की मौत हुई है और 268 लोग घायल हुए हैं, जिनमें ज्यादातर प्रवासी कामगार हैं।
  • संपत्ति का नुकसान: हमलों में एयरपोर्ट, तेल डिपो, पानी के प्लांट, होटल और दूतावासों को निशाना बनाया गया है।
  • ताजा स्थिति: 26 मार्च को भी यूएई में मिसाइलें इंटरसेप्ट की गई हैं, जिससे मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हुई है।

प्रवासियों और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर क्या होगा असर?

इन हमलों का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। GCC देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

प्रभावित क्षेत्र मुख्य जानकारी
प्रवासी (Expats) हमलों में विदेशी मजदूरों के हताहत होने से सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हवाई और समुद्री रास्ता एयरपोर्ट्स और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर असर पड़ा है।
तेल और ऊर्जा तेल सुविधाओं पर हमले से दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है।
सुरक्षा कानून GCC ने UN चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही है।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने भी जानकारी दी है कि देश के आसमान में कई मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया गया है। खाड़ी देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ईरान को इन हमलों को रोकने के लिए मजबूर करें, क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता को भी खतरा पैदा हो गया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.