खाड़ी देशों ने तेल और गैस की सप्लाई पर लगाई रोक, ईरान युद्ध के कारण लिया गया बड़ा फैसला
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर अब दुनिया भर के देशों पर पड़ने लगा है. कतर, कुवैत और बहरीन जैसे बड़े खाड़ी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बंद होने के बाद तेल और गैस शिपमेंट पर फोर्स मेजर (Force Majeure) घोषित कर दिया है. इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बन गया है.
फोर्स मेजर (Force Majeure) क्या है और किन देशों ने इसे लागू किया?
जब युद्ध या किसी बड़ी आपदा के कारण कोई कंपनी अपना काम या सप्लाई पूरी नहीं कर पाती, तो वह कानूनी तौर पर फोर्स मेजर लागू करती है. ईरान पर हमलों और जहाजों के लिए खतरे को देखते हुए खाड़ी देशों ने यह कदम उठाया है.
- कतर (QatarEnergy) ने 4 मार्च 2026 को सभी LNG शिपमेंट पर रोक लगा दी. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत LNG कतर ही देता है.
- कुवैत (KPC) ने 7 मार्च 2026 को क्रूड ऑयल और रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई पर रोक लगाई.
- बहरीन (Bapco Energies) ने 9 मार्च 2026 को अपनी रिफाइनरी पर हमले के बाद इसे लागू किया.
ग्लोबल मार्केट और आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत काफी तेजी से ऊपर गई है. 8 मार्च 2026 को यह 100 डॉलर के पार पहुंच गया और बाद में 126 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया. खाड़ी देशों के इस फैसले से सप्लाई चेन पूरी तरह से प्रभावित हुई है.
- खाड़ी देशों में तेल उत्पादन में हर दिन 10 मिलियन बैरल की कटौती की गई है.
- संकट को कम करने के लिए IEA देशों ने इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल निकालने पर सहमति जताई है.
- बड़ी बीमा कंपनियों ने भी इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों का इंश्योरेंस खत्म कर दिया है.
कतर के ऊर्जा मंत्री ने साफ कहा है कि अगर यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा. भारत और गल्फ में रहने वाले प्रवासियों के लिए इसके कारण महंगाई बढ़ सकती है और आने वाले दिनों में यात्रा और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी महंगा हो सकता है.




