Hormuz Strait News: हॉर्मुज की खाड़ी से 16 जहाजों ने किया पार, ईरान ने वसूला करोड़ों का टैक्स, ट्रंप ने दी हमले की चेतावनी.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही में थोड़ी तेजी आई है। समुद्री खुफिया फर्म विंडवर्ड (Windward) के अनुसार, बुधवार को यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जो पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रही है। हालांकि, संघर्ष शुरू होने से पहले यहां से रोजाना करीब 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, जिसके मुकाबले अभी भी ट्रैफिक 95 फीसदी कम है। ईरान ने इस रास्ते पर अपनी कड़ी निगरानी और नए नियम लागू कर दिए हैं जिससे समुद्री व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है।
ईरान ने लगाया जहाजों पर टैक्स और नया नियम
ईरान ने हॉर्मुज के रास्ते को अपने दुश्मनों के लिए बंद कर दिया है लेकिन मित्र देशों के जहाजों को निकलने की अनुमति दी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित रास्ते के लिए जहाजों से भारी भरकम फीस मांगी जा रही है। विंडवर्ड फर्म ने बताया है कि 1 अप्रैल को हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों में ज्यादातर ईरान से जुड़े टैंकर थे।
- भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों के जहाजों को अनुमति मिली है।
- जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए करीब 2 मिलियन डॉलर की फीस की बात सामने आई है।
- निकलने वाले जहाजों को ईरान के समुद्री क्षेत्र के अंदर एक खास गलियारे से गुजरना पड़ता है।
- ईरान का कहना है कि यह रास्ता केवल उनके दोस्तों के लिए खुला है।
अंतरराष्ट्रीय देशों की बैठक और अमेरिका का रुख
ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने 40 से अधिक देशों के साथ एक अहम बैठक की है। इस बैठक में ईरान से इस रास्ते को बिना किसी शर्त के तुरंत खोलने की मांग की गई है। वहीं अमेरिका ने भी इस पर सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अप्रैल तक की समय सीमा दी है और रास्ता न खुलने पर जवाबी कार्रवाई की बात कही है।
| महत्वपूर्ण जानकारी | ताजा अपडेट |
|---|---|
| बुधवार को जहाजों की संख्या | 16 जहाज |
| ट्रैफिक में गिरावट | करीब 95 प्रतिशत |
| अमेरिका की डेडलाइन | 6 अप्रैल 2026 |
| कुवैत पर असर | मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला |
ईरान और ओमान के बीच भी समुद्री यातायात को लेकर बातचीत चल रही है ताकि शांति के समय के लिए नए नियम बनाए जा सकें। ओमान के तीन जहाजों ने हाल ही में इस रास्ते का इस्तेमाल किया है। दुनिया भर के देश अब इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान न पहुंचे।




