भारत सरकार का बड़ा ऐलान, विदेशी कंपनियों को डेटा सेंटर पर 2047 तक मिलेगी भारी छूट
भारत सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। देश को 30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लिए सरकार ने डेटा सेंटर (Data Center) उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। नई जानकारी के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर का बिजनेस स्थापित करने वाली विदेशी कंपनियों और डेवलपर्स को टैक्स में भारी राहत दी जाएगी। ड्राफ्ट नेशनल डेटा सेंटर पॉलिसी 2025 के तहत डेवलपर्स को 20 साल तक टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
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क्या है 20 साल की टैक्स छूट योजना?
सरकार की योजना के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर की क्षमता को 2035 तक 1.5 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 14 गीगावाट तक ले जाना है। इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी में डेटा सेंटर डेवलपर्स के लिए 20 साल के ‘टैक्स हॉलिडे’ का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि एक निश्चित समय तक कंपनियों को टैक्स में विशेष छूट मिलेगी। इसके अलावा, गिफ्ट सिटी (GIFT City) में मौजूद यूनिट्स को पहले से ही 10 साल की इनकम टैक्स छूट मिलती है। बजट चर्चाओं में इसे और आगे बढ़ाने की मांग की गई है ताकि मार्च 2026 के बाद भी यह फायदा मिलता रहे।
किन शर्तों पर मिलेगा यह फायदा?
यह टैक्स छूट सभी के लिए बिना शर्त नहीं है, बल्कि इसे परफॉरमेंस से जोड़ा गया है। कंपनियों को यह लाभ लेने के लिए कुछ खास टारगेट पूरे करने होंगे:
- बिजली की खपत में कुशलता (Power Usage Effectiveness) दिखानी होगी।
- रोजगार पैदा करने के निश्चित लक्ष्य पूरे करने होंगे।
- जो विदेशी कंपनियां 100 मेगावाट (MW) या उससे ज्यादा की क्षमता वाली लीज या ऑपरेशन चलाएंगी, उन्हें भारत में ‘परमानेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (PE) का दर्जा दिया जा सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने निर्माण सामग्री और कूलिंग सिस्टम जैसे बड़े खर्चों पर जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) देने का भी प्रस्ताव दिया है।
बजट 2026-27 और नए नियम
1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स कानून लागू होने जा रहा है, जिसका मकसद विदेशी कंपनियों के लिए नियमों को आसान बनाना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में सर्विस सेक्टर के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय फर्मों को दी जाने वाली कुछ तकनीकी सेवाओं पर टैक्स की दरें भी तर्कसंगत बनाई जा रही हैं, जिससे प्रभावी टैक्स 10% से भी कम हो सकता है।





