भारत की अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल की कीमतों का बड़ा असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी Crisil की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तेल के दाम बढ़ते हैं तो साल 2027 तक भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) जीडीपी के 2% तक पहुंच सकता है। यह जानकारी ANI न्यूज़ ने 17 अप्रैल 2026 को साझा की है।

📰: Iran War Update: हवाई यात्रा पर लगा ब्रेक, दुनिया भर में जेट फ्यूल की कमी से बढ़ेंगे टिकट के दाम

तेल की कीमतों और घाटे का क्या हिसाब है?

Crisil ने बताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत 82 से 87 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती है, तो भारत का घाटा बढ़कर 2% हो सकता है। वहीं, अगर तेल की कीमत 75 से 80 डॉलर के बीच रहती है और अमेरिका से निर्यात टैरिफ में छूट मिलती है, तो यह घाटा 1.5% रह सकता है। साल 2026 के लिए यह अनुमान 0.8% लगाया गया था। एजेंसी का मानना है कि सेवाओं के व्यापार से होने वाली कमाई इस घाटे को सीमित रखने में मदद करेगी।

निर्यात में गिरावट और UAE का क्या रोल है?

मार्च के महीने में भारत के सामानों के निर्यात में 7.4% की कमी आई है। सबसे ज़्यादा असर रत्नों और गहनों (gems and jewellery) के निर्यात पर पड़ा, जिसमें 29.3% की भारी गिरावट देखी गई। अब अमेरिका की जगह UAE भारत के गहनों के लिए सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव की वजह से ग्लोबल ट्रेड और सामानों की कीमतों पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे भारत के व्यापार पर भी असर हुआ है।

स्थिति (Scenario) तेल की कीमत (USD) संभावित CAD (FY27)
बेस केस (Base Case) 75-80 प्रति बैरल 1.5% of GDP
वैकल्पिक स्थिति (Alternate Case) 82-87 प्रति बैरल 2.0% of GDP
पिछला अनुमान (FY26) 0.8% of GDP
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.