रक्षा क्षेत्र में भारत बनेगा आत्मनिर्भर, Rajnath Singh ने किया ऐलान, दुनिया के टॉप देशों में शामिल होगा हिंदुस्तान.
भारत अब रक्षा के मामले में किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा है कि भारत जल्द ही इस सेक्टर में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। इससे न केवल देश की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि दुनिया के बड़े देशों की लिस्ट में भी भारत का नाम शामिल होगा। सरकार का पूरा जोर अब देश में ही हथियार और उपकरण बनाने पर है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात के लक्ष्य क्या हैं?
भारत ने पिछले कुछ सालों में हथियारों और रक्षा उपकरणों के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। अब देश में बनने वाले सामान की संख्या बढ़ी है और दूसरे देशों को निर्यात भी किया जा रहा है। नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि अब तक क्या हासिल हुआ और आगे का लक्ष्य क्या है:
| विवरण | आंकड़े / लक्ष्य |
|---|---|
| रक्षा उत्पादन (FY 2024-25) | 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा |
| रक्षा निर्यात (FY 2024-25) | लगभग 24,000 करोड़ रुपये |
| निर्यात लक्ष्य (अप्रैल 2026) | 29,000 करोड़ रुपये |
| निर्यात लक्ष्य (FY 2029-30) | 50,000 करोड़ रुपये |
| उत्पादन लक्ष्य (2029 तक) | 3 लाख करोड़ रुपये |
| घरेलू निर्माण का हिस्सा | 65% रक्षा उपकरण |
| FY 2025-26 निर्यात रिकॉर्ड | 38,424 करोड़ रुपये |
सरकार आत्मनिर्भर बनने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने कई नए नियम बनाए हैं ताकि प्राइवेट कंपनियां और स्टार्टअप्स भी हथियार बनाने में आगे आएं। Aatmanirbhar Bharat मुहिम के तहत अब उन उपकरणों को प्राथमिकता दी जा रही है जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। इसके लिए DAP 2020 जैसे नियमों का पालन किया जा रहा है।
विदेशी निवेश यानी FDI के नियमों को भी आसान किया गया है, जिससे नई टेक्नोलॉजी भारत आ सके। साथ ही, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में Defence Industrial Corridors बनाए गए हैं। हाल ही में सरकार ने 1000-kg का हवाई बम भारत में ही डिजाइन करने का काम भी शुरू किया है, जिसे आने वाले ढाई साल में तैयार किया जाएगा।




