भारत ने UAE के साथ बड़े रक्षा समझौते के तुरंत बाद अब सऊदी अरब के साथ भी एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक की है। रियाद में 28 जनवरी 2026 को हुई इस मीटिंग में दोनों देशों ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। यह बैठक भारत की खाड़ी देशों के साथ अपनी दोस्ती और रणनीतिक पकड़ को और मजबूत बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
आपके लिए जरूरी खबर: UAE के बाद अब Saudi Arabia से भारत ने मिलाया हाथ, सुरक्षा और आतंकवाद पर बनी सहमति।
सुरक्षा बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
भारत-सऊदी अरब सुरक्षा वर्किंग ग्रुप की यह तीसरी बैठक थी। इसमें भारत की तरफ से MEA के जॉइंट सेक्रेटरी Vinod Bahade शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर सहमति बनी है:
- आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद (फंडिंग) और कट्टरपंथ को रोकना।
- साइबर हमलों और AI जैसी नई टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर नजर रखना।
- कानून व्यवस्था और न्यायिक मामलों में एक-दूसरे का सहयोग करना।
- बैठक में भारत में हुए पुराने आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
UAE के साथ हुए समझौते और भविष्य के लक्ष्य
सऊदी अरब से बातचीत से पहले भारत ने 19 जनवरी 2026 को UAE के साथ भी एक अहम रक्षा समझौता किया था। खाड़ी देशों के साथ भारत का रिश्ता व्यापार और सुरक्षा के मामले में नया रूप ले रहा है, जिसे इस टेबल से समझा जा सकता है:
| विषय | महत्वपूर्ण डेटा |
|---|---|
| एनर्जी डील | ADNOC Gas और HPCL के बीच 3 बिलियन डॉलर का LNG समझौता हुआ। |
| व्यापार लक्ष्य | साल 2032 तक व्यापार को 200 बिलियन डॉलर तक ले जाने का टारगेट। |
| SHANTI कानून | भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए नया कानून लाया गया। |
| Data Embassy | डिजिटल सुरक्षा के लिए UAE में भारत की पहली डेटा एम्बेसी बनेगी। |
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखेगा। हाल ही में भारत आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भी माना है कि भारत और खाड़ी देशों के ये आपसी समझौते पूरी दुनिया की शांति के लिए जरूरी हैं। भारत किसी भी स्थानीय विवाद में शामिल हुए बिना अपनी सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है।




