ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियों ने फिर से ईरानी तेल खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम दुनिया भर में हो रही एनर्जी की कमी और तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए उठाया गया है। भारत के रिफाइनर अब सरकार से आधिकारिक निर्देश और भुगतान के तरीकों पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
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नए नियम और छूट की समय सीमा क्या है?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक जनरल लाइसेंस जारी किया है जिसमें इस छूट के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। यह फैसला मुख्य रूप से समुद्र में पहले से मौजूद तेल के लिए लिया गया है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- यह छूट 20 मार्च 2026 को जारी की गई है और केवल 30 दिनों के लिए वैध है।
- यह छूट उन कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी जो 20 मार्च या उससे पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे।
- तेल के लेन-देन की यह अनुमति 19 अप्रैल 2026 तक ही रहेगी।
- ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि इससे बाजार में करीब 140 मिलियन बैरल तेल आने की उम्मीद है।
इस फैसले का भारत और बाजार पर क्या असर होगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में तेल आयात करता है। ईरानी तेल पर लगी पाबंदी हटने से भारत को सस्ते तेल के विकल्प मिल सकते हैं। इससे पहले भारत ने रूसी तेल की खरीदारी भी बढ़ा दी थी जब उस पर से भी प्रतिबंध हटाए गए थे।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख देश | अमेरिका, भारत और ईरान |
| छूट का उद्देश्य | ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करना |
| तेल की मात्रा | लगभग 140 मिलियन बैरल |
| समय सीमा | 19 अप्रैल 2026 तक |
अमेरिका और ईरान का इस पर क्या रुख है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को कम करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह पूरी तरह से युद्धविराम नहीं है। दूसरी ओर, ईरान के दूतावास ने कहा है कि उनके पास फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कोई अतिरिक्त कच्चा तेल मौजूद नहीं है। अमेरिका का यह कदम चीन को ईरानी तेल का एकमात्र खरीदार बनने से रोकने की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
