पश्चिम एशिया में सीजफायर का भारत ने किया स्वागत, MEA ने कहा शांति के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी जरूरी
भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष विराम यानी सीजफायर का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता साफ होगा। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और सुरक्षा की बहाली के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने शांति बहाली के लिए क्या सुझाव दिए?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि किसी भी विवाद को खत्म करने के लिए तीन चीजें सबसे अहम हैं जिनमें तनाव कम करना, आपस में बातचीत करना और कूटनीति का सहारा लेना शामिल है। भारत का मानना है कि इन रास्तों को अपनाकर ही लंबे समय तक शांति बनाए रखी जा सकती है। इससे युद्ध प्रभावित इलाकों में रहने वाले आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ग्लोबल ट्रेड और समुद्री सुरक्षा पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने सीजफायर के साथ-साथ समुद्री व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। सरकार ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए। इसके प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:
- Strait of Hormuz के जरिए होने वाले व्यापार में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
- नेविगेशन की आजादी बहाल होने से दुनिया भर में सामान की सप्लाई आसान होगी।
- तनाव कम होने से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
- वैश्विक व्यापार के दोबारा पटरी पर लौटने से आर्थिक स्थिरता आने की संभावना है।




