भारतीय वायु सेना (IAF) और अमेरिका की कंपनी GE Aerospace ने एक अहम समझौते पर साइन किए हैं। अब भारत में ही F404-IN20 इंजन के लिए एक विशेष डिपो बनाया जाएगा। इससे LCA Tejas विमानों के रखरखाव में आसानी होगी और भारत को अब इंजन रिपेयर के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस कदम से विमानों की मरम्मत में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

नया डिपो सेंटर कैसे काम करेगा और कौन संभालेगा?

इस नए डिपो की पूरी जिम्मेदारी भारतीय वायु सेना (IAF) की होगी। इसे IAF ही चलाएगी और इसका रखरखाव भी करेगी। GE Aerospace इस काम में तकनीकी मदद, ट्रेनिंग, सपोर्ट स्टाफ और जरूरी सामान मुहैया कराएगी। इसमें खास तौर पर ‘ऑन-कंडीशन’ मेंटेनेंस तरीका अपनाया जाएगा, जिसका मतलब है कि इंजन की मरम्मत तभी की जाएगी जब उसकी परफॉर्मेंस या घिसावट एक तय सीमा तक पहुंचेगी।

इंजनों की डिलीवरी और महत्वपूर्ण तारीखें

GE Aerospace और HAL के बीच इंजनों की सप्लाई और योजना को लेकर कई अहम तारीखें तय की गई हैं:

तारीख/समय विवरण
सितंबर 2025 97 LCA Mk 1A के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ
30 सितंबर 2025 चौथा F404-IN20 इंजन HAL को मिला
7 नवंबर 2025 113 इंजनों की सप्लाई के लिए समझौता हुआ
5 दिसंबर 2025 पांचवां F404-IN20 इंजन HAL को सौंपा गया
2026-27 वित्त वर्ष 24 इंजनों की डिलीवरी की उम्मीद
2027 से 2032 इंजनों की डिलीवरी की पूरी समय सीमा
भविष्य में हर साल 30 इंजन दिए जाएंगे

इस फैसले से भारत को क्या फायदा होगा?

GE Aerospace की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी ने कहा कि यह कदम तेजास फ्लीट की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। इस सुविधा के चालू होने से इंजन रिपेयर के लिए विदेश भेजने की जरूरत नहीं होगी, जिससे turnaround समय में सुधार होगा। इससे भारतीय वायु सेना के पास हमेशा तैयार विमान रहेंगे और देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।