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भारतीय प्रवासी किस सरकारी 56 इंच सुरक्षा के इंतेजार में थे. हथकड़ी के साथ इतना बेइज्जत होकर आना पड़ा अपने लोगो को वापस.

Lov Singh by Lov Singh
फ़रवरी 11, 2025
in India
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आज की बदलती दुनिया में, जब राष्ट्र अपने नैतिक मूल्यों और इंसानियत के सिद्धांतों पर खरा उतरने की कसौटी में मापा जाता है, तो हाल की घटनाएं इस बात की याद दिला देती हैं कि स्वाभिमान केवल बड़े-बड़े देशों का ही नहीं, बल्कि हर देश का आधार होना चाहिए। हाल ही में, एक ओर कोलंबिया सरकार ने ट्रंप द्वारा भेजी गई फ्लाइट को वापस लौटा कर अपनी गरिमा और नैतिक सिद्धांतों की मिसाल कायम की, वहीं दूसरी ओर, भारतीय सरकार ने हथकड़ी लगे हुए प्रवासियों को स्वीकार करके एक ऐसा संदेश दिया कि देश का स्वाभिमान कहीं खो गया है।


कोलंबिया का निर्णय: छोटी मगर गरिमामयी

कोलंबिया, एक छोटा देश होते हुए भी, अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा। जब ट्रंप द्वारा भेजी गई आपातकालीन फ्लाइट, जिसे उम्मीद थी कि संकट के समय इंसानियत की सहायता करेगी, वहां पहुंचाई गई, तो कोलंबिया ने इसे ठुकराते हुए लौटा दिया। यह कदम सिर्फ एक राजनैतिक निर्णय नहीं, बल्कि नैतिकता और गरिमा का प्रतीक था। कोलंबिया ने साबित कर दिया कि देश का स्वाभिमान उसके आकार से नहीं, बल्कि उसके नैतिक मूल्यों से मापा जाता है।



भारत का संकट: स्वाभिमान में गिरावट

वहीं, भारतीय सरकार का हालिया कदम सोचनीय है। हमारे देश में प्रवासी, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, अक्सर मेहनत के बदले में सम्मान की अपेक्षा करते हैं। लेकिन जब हाथकड़ी लगे प्रवासियों को स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या हमारे पास अपने स्वाभिमान को बचाने की जिद है? ऐसी घटनाएं न सिर्फ हमारे दिलों को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि मानवीय गरिमा के मुद्दे पर हमें और अधिक सजग होने की आवश्यकता है।


दोनों घटनाओं से सीख

  • गरिमा और नैतिकता का महत्व:
    कोलंबिया के फैसले से यह सीख मिलती है कि नैतिकता के सिद्धांतों पर कायम रहना कितना जरूरी है। चाहे देश छोटा हो या बड़ा, गरिमा और स्वाभिमान को हमेशा सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

  • प्रवासी और उनकी भूमिका:
    प्रवासी हमारे देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं। उन्हें सम्मान और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, जिससे उनके साथ अन्याय न हो और उनका आत्म-सम्मान बरकरार रहे।

  • राजनीतिक और सामाजिक संदेश:
    जहां एक ओर कोलंबिया ने अपनी नीति के तहत गर्व से ठुकराव जताया, वहीं भारतीय निर्णय से यह प्रतीत होता है कि कभी-कभी आर्थिक और राजनीतिक दबाव के कारण स्वाभिमान को भी दरकिनार कर दिया जाता है।

दो देशों के इस विरोधाभासी फैसले ने हम सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जहां कोलंबिया ने अपने छोटे आकार के बावजूद नैतिकता और गरिमा की मिसाल कायम की, वहीं भारत में प्रवासियों के साथ अनुचित व्यवहार से देश का स्वाभिमान ठोकर खा गया। हमें याद रखना चाहिए कि स्वाभिमान और इंसानियत ऐसे मूल्य हैं जिन्हें कभी भी व्यापार या राजनीति के दबाव में नहीं खोना चाहिए।

क्या आपको भी लगता है कि हमें अपने स्वाभिमान को पुनः जीवित करने की आवश्यकता है? अपने विचार कमेंट बॉक्स में साझा करें और इस पोस्ट को शेयर करें,

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