भारतीय रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर पर, एक डॉलर की कीमत पहली बार 93 रुपये के पार
भारतीय रुपया 20 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को रुपया 92.92 पर खुला और देखते ही देखते यह 93 के आंकड़े को पार कर गया। दिन के दौरान रुपया 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकालने की वजह से रुपये की कीमत में यह बड़ी गिरावट देखी गई है।
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रुपये की कीमत में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
करंसी एक्सपर्ट्स और मार्केट एनालिस्ट्स ने इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है।
- विदेशी निवेश की निकासी: मार्च 2026 में अब तक 8 बिलियन डॉलर से ज्यादा का फंड बाहर जा चुका है।
- कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया है।
- ग्लोबल रिस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर भाग रहे हैं।
आम आदमी और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
रुपये की इस कमजोरी का सीधा असर भारत में आयात होने वाली चीजों पर पड़ेगा जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। हालांकि, खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह एक तरह से फायदे की बात है। जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेश से पैसे भेजने पर उनके परिवार को पहले के मुकाबले ज्यादा रुपये मिलते हैं।
| तारीख | रुपये की स्थिति (प्रति डॉलर) |
|---|---|
| 18 मार्च 2026 | 92.63 (पिछला रिकॉर्ड) |
| 20 मार्च 2026 | 93.49 (नया रिकॉर्ड लो) |
RBI की ओर से क्या कदम उठाए गए?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने के लिए लगातार मार्केट में हस्तक्षेप कर रहा है। आरबीआई ने डॉलर की बिक्री की है और बाजार में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए कई उपाय किए हैं। एक्सपर्ट के एन डे के अनुसार, जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बैंक स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि रुपये की चाल को स्थिर किया जा सके।




