रुपये में ताजा गिरावट और RBI का रुख
भारतीय रुपये ने हाल के दिनों में एक बड़ी गिरावट दर्ज की है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 91 रुपये के करीब पहुँच गया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की मुद्रा AED के सामने इसका मूल्य 25 रुपये के आसपास आ गया है। इस बार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की दर को नियंत्रित करने से साफ़ इनकार कर दिया है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रुपये का मूल्य अभी और गिर सकता है।
2025 में रुपये का प्रदर्शन
भारतीय रुपये के लिए पिछला वर्ष, 2025, निराशाजनक रहा। रुपया 2025 में 4.72% की वार्षिक गिरावट के साथ समाप्त हुआ, जो 2022 के बाद से इसका सबसे कमजोर वार्षिक प्रदर्शन था। यह लगातार दबाव में रहने वाले रुपये की कमजोर स्थिति को दर्शाता है और भविष्य के लिए चिंताएं बढ़ाता है।
वर्तमान स्थिति और निकट-अवधि के पूर्वानुमान
वर्तमान में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.85 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट जारी रह सकती है। कुछ सबसे निराशावादी दृष्टिकोणों के अनुसार, रुपया जल्द ही 92 रुपये तक गिर सकता है, जिससे आयात महंगा हो जाएगा और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
2026 के लिए रुपये के पूर्वानुमान
2026 के लिए रुपये के पूर्वानुमान अलग-अलग हैं, लेकिन अधिकांश संकेत आगे की कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग सर्वेक्षण में 35 अर्थशास्त्रियों ने वर्ष के अंत तक रुपये को 89.42 प्रति डॉलर तक देखा है। वहीं, NDF बाजार का पूर्वानुमान है कि 2026 के अंत तक रुपया 95 तक कमजोर हो सकता है। अधिकांश विश्लेषकों की सहमति 90-91 प्रति डॉलर की सीमा में बनी हुई है, लेकिन 95 का आंकड़ा एक गंभीर चेतावनी है।
गिरावट के कारण और संभावित सहारा
रुपये पर दबाव के मुख्य कारण नियमित कॉर्पोरेट डॉलर खरीद, अमेरिकी टैरिफ और पूंजी बहिर्वाह हैं। ये कारक डॉलर की मांग बढ़ाते हैं और रुपये को कमजोर करते हैं। हालांकि, मजबूत आर्थिक विकास, कम मुद्रास्फीति और RBI का रणनीतिक हस्तक्षेप (भले ही वर्तमान में मना किया गया हो) रुपये को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान कर सकते हैं। इन कारकों पर भविष्य में कड़ी नजर रखनी होगी।
Last Updated: 19 January 2026




