मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर काफी बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह बातचीत की आड़ में जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है। इसी बीच क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है। इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखने लगा है और भारी आर्थिक नुकसान की खबरें आ रही हैं।

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ईरान के आरोप और युद्ध की तैयारी की मुख्य बातें

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर ग़ालिबफ़ ने 29 मार्च 2026 को बयान दिया कि अमेरिकी सेना बातचीत का नाटक कर रही है जबकि उनकी असल मंशा जमीनी हमला करने की है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ईरानी नौसेना के कमांडर ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी युद्धपोत USS Abraham Lincoln अगर मिसाइल रेंज में आता है, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। ईरान ने अपनी शर्तों की एक लिस्ट भी दी है जिसमें भविष्य में युद्ध न होने की गारंटी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता मांगी गई है।

अमेरिका की सैन्य तैनाती और क्षेत्रीय शांति के प्रयास

क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हलचल काफी बढ़ गई है। पेंटागन की तरफ से कथित तौर पर हफ्तों तक चलने वाले जमीनी अभियान की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

विषय विवरण
अमेरिकी सैन्य तैनाती युद्धपोत USS Tripoli 3,500 सैनिकों के साथ पहुंचा
आर्थिक नुकसान अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को 1.4 से 2.9 बिलियन डॉलर का नुकसान
इस्लामाबाद बैठक पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल
UNSC प्रस्ताव प्रस्ताव 2817 के जरिए हमले रोकने का आग्रह किया गया
बैठक का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को कम करना

इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक का नेतृत्व पाकिस्तान कर रहा है। पहले यह बैठक तुर्किये में होनी थी, लेकिन बाद में इसे पाकिस्तान शिफ्ट किया गया। सऊदी अरब और अन्य देश मिलकर कोशिश कर रहे हैं कि इस संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाया जा सके ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।