ईरान की सेना ने विदेशी हमलावरों को भारी चोट पहुँचाने के लिए अपनी पूरी तैयारी का एलान किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका पर दोहरी चाल चलने का आरोप लगाया और कहा कि वे बातचीत का नाटक कर गुपचुप तरीके से ज़मीनी हमले की योजना बना रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अमेरिकी मरीन सेना मिडिल ईस्ट पहुँच चुकी है।

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ईरानी अधिकारियों ने क्या चेतावनी दी है?

ईरान के संसद अध्यक्ष ने साफ़ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिकी सेना ईरान की धरती पर कदम रखती है, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इसका असर अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों पर भी पड़ेगा। इस तनाव के बीच कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि ईरान की सेना अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतज़ार कर रही है ताकि उन्हें कड़ा सबक सिखाया जा सके।
  • IRGC ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरानी यूनिवर्सिटीज़ पर हुए हमलों की निंदा नहीं की, तो मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी यूनिवर्सिटी कैंपस को निशाना बनाया जा सकता है।
  • Foreign Ministry के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने पुष्टि की है कि ईरान के कई रिसर्च सेंटर्स और यूनिवर्सिटीज़ पर हमले हुए हैं।
  • Ebrahim Zolfaghari ने बताया कि शुक्रवार को एक एयरबेस पर हुए हमले में एक रिफ्यूलिंग विमान पूरी तरह नष्ट हो गया और तीन अन्य को नुकसान पहुँचा है।

क्षेत्र में मौजूदा हालात और कूटनीतिक कोशिशें

मिडिल ईस्ट में हालात तेज़ी से बदल रहे हैं। एक तरफ हमले जारी हैं और दूसरी तरफ शांति की कोशिशें भी की जा रही हैं। IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक Bandar Khamir शहर में हुए हमलों में 5 लोगों की जान चली गई है। तनाव को कम करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर बैठकें भी शुरू हो गई हैं।

घटना विवरण
अमेरिकी मरीन आगमन अमेरिकी मरीन की एक टुकड़ी 28 मार्च 2026 को मिडिल ईस्ट पहुँच चुकी है।
इस्लामाबाद बैठक Saudi Arabia, Pakistan, Turkey और Egypt के विदेश मंत्रियों ने तनाव कम करने पर चर्चा की।
Houthi कार्रवाई यमन के हूती विद्रोहियों ने इज़रायल पर मिसाइल हमला किया, जो असफल रहा।
बंदर खमीर हमला अमेरिकी और इज़रायली हमलों में ईरान के बंदरगाह शहर को निशाना बनाया गया।