Iran Diplomacy: अमेरिका की रणनीतिक विफलता का दावा, इस्लामाबाद में बातचीत के लिए ईरान ने रखा 10 पॉइंट्स का प्लान
ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि ईरान की वर्तमान रणनीति क्षेत्रीय स्थिरता को सुरक्षित करने पर केंद्रित है। इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत और अमेरिका के सामने रखी गई शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।
इस्लामाबाद वार्ता और ईरान की 10 शर्तें क्या हैं?
ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर माजिद तख्त रवानची ने साफ किया कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत ईरान के प्रस्तावित 10-पॉइंट प्लान पर आधारित होगी। ईरान ने कूटनीति का स्वागत किया है, लेकिन यह चेतावनी भी दी है कि वह किसी भी धोखे या सैन्य हमले के रास्ते बनाने वाली बातचीत को स्वीकार नहीं करेगा। इस प्लान की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की पूरी तरह वापसी।
- ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण स्थापित करना।
- गैर-आक्रामकता की गारंटी और शत्रुता का अंत।
अमेरिका की रणनीतिक विफलता और नया ग्लोबल ऑर्डर
अली अकबर वेलायती ने हालिया युद्धविराम को अमेरिका की एक मजबूर रियायत और उसकी रणनीतिक विफलता बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब एक शक्ति के बजाय कई शक्तियों वाले (multipolar) दौर की ओर बढ़ रही है। इस नए बदलाव में ईरान खुद को ‘इस्लामी ध्रुव’ के केंद्र के रूप में देखता है। वेलायती के अनुसार, ईरान की सैन्य तैयारी इस समय अपने चरम पर है।
सुरक्षा चेतावनी और भविष्य की तैयारी
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बताया कि अमेरिका को बातचीत की शर्तें मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ‘हिब्रू-अरब-अमेरिकी मोर्चे’ की तरफ से युद्धविराम का उल्लंघन होता है या कोई गणना संबंधी गलती होती है, तो ईरान की सेना इसका निर्णायक जवाब देगी। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीतिक बातचीत और युद्धविराम दो अलग बातें हैं और 10-पॉइंट प्लान ही शत्रुता खत्म करने की मुख्य शर्त है।




