ईरान ने 2 और लोगों को दी फांसी की सज़ा, अब तक 6 विरोधी नेताओं की जा चुकी है जान, दुनिया भर में विरोध चालू.
ईरान में सरकार विरोधी गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े होने के आरोप में फांसी देने का सिलसिला तेज़ हो गया है. 4 अप्रैल 2026 को ईरान ने दो और व्यक्तियों, Vahid Bani Amerian और Abolhassan Montazer को फांसी दे दी. इन दोनों पर प्रतिबंधित संगठन PMOI/MEK का सदस्य होने का आरोप था. पिछले कुछ दिनों के अंदर यह छठी फांसी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है.
किन लोगों को दी गई फांसी और क्या थे आरोप?
ईरान की न्यायपालिका ने जिन दो लोगों को फांसी दी है, उनमें एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और एक आर्किटेक्ट शामिल थे. जेल अधिकारियों ने यह कार्रवाई करज की घेज़ल हेसार जेल में की है. सरकार का कहना है कि ये लोग देश की सुरक्षा के खिलाफ काम कर रहे थे और इनके पास हथियार और विस्फोटक सामग्री होने का दावा किया गया है.
- Vahid Bani Amerian: इनके पास मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री थी और ये एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे.
- Abolhassan Montazer: ये पेशे से आर्किटेक्ट थे और पहले भी राजनीतिक कैदी रह चुके थे.
- आरोप: इन पर सशस्त्र विद्रोह और ‘भगवान के खिलाफ दुश्मनी’ (Moharebeh) जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे.
- मुकदमा: इनके केस की सुनवाई नवंबर 2024 में हुई थी और बाद में दोबारा सुनवाई भी की गई थी.
पिछले 10 दिनों में दी गई फांसी का विवरण
ईरान में हाल के दिनों में फांसी की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है. मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि इन कैदियों को उनके वकीलों या परिवारों से आखिरी बार मिलने का मौका भी नहीं दिया गया. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी इन मौतों को क्रूर बताया है और ईरान से तुरंत फांसी रोकने की अपील की है.
| तारीख | नाम |
|---|---|
| 4 अप्रैल 2026 | Vahid Bani Amerian और Abolhassan Montazer |
| 30 और 31 मार्च 2026 | Mohammad Taghavi, Akbar Daneshvarkar, Babak Alipour और Pouya Ghobadi |
| 2 अप्रैल 2026 | Amirhossein Hatami (18 वर्षीय प्रदर्शनकारी) |
दुनिया भर के संगठनों ने जताई कड़ी नाराजगी
एम्नेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इन फांसी की सजाओं को अवैध बताया है. संगठनों का कहना है कि इन लोगों से जबरन जुर्म कबूल करवाया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी. NCRI की अध्यक्ष मरियम रजवी ने इसे ‘राज्य द्वारा की गई हत्या’ बताया है और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार विरोध को दबाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है.




