ईरान और खाड़ी के तनाव से कच्चे तेल में भारी उछाल, यूरोप को 3 अरब यूरो का नुकसान, Air India का किराया भी बढ़ेगा
ईरान और खाड़ी देशों (Gulf region) में चल रहे सैन्य तनाव का सीधा असर अब पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट पर दिखने लगा है. EU Commission की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 11 मार्च 2026 को साफ किया कि इस तनाव के कारण एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. इसका असर आम लोगों से लेकर बड़ी कंपनियों और एयरलाइंस पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई का खतरा फिर से मंडरा रहा है.
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खाड़ी में तनाव का दुनिया पर क्या असर पड़ा?
पिछले 10 दिनों में तेल और गैस के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे यूरोप को फॉसिल फ्यूल मंगाने के लिए 3 अरब यूरो का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है. गैस की कीमतों में 50 प्रतिशत और कच्चे तेल (Oil) में 27 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil का दाम एक बार फिर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है.
Strait of Hormuz के पास समुद्री रास्तों में तीन और जहाजों पर हमले की खबर आई है, जिससे वहां से व्यापार करना महंगा और जोखिम भरा हो गया है. हालात को देखते हुए G7 देशों ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. इसके अलावा IEA ने बाजार को संभालने के लिए 400 मिलियन बैरल तेल अपने रिजर्व से निकालने का बड़ा प्रस्ताव दिया है ताकि सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके.
भारत और आम लोगों पर इसका क्या प्रभाव होगा?
- कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर हवाई यात्रा पर पड़ने लगा है. Air India और अन्य एयरलाइंस ने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है.
- खाड़ी क्षेत्र की प्रमुख उत्पादक कंपनियों, जैसे Bahrain की Bapco, Qatar और Kuwait की कंपनियों ने काम में रुकावट के कारण ‘Force Majeure’ लागू कर दिया है.
- इससे खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी भारतीयों और वहां के उद्योगों पर भी सीधा असर पड़ सकता है.
- लगातार बढ़ती एनर्जी लागत के कारण यूरोप में स्टील और एल्युमिनियम बनाने वाली कंपनियों ने अपना प्रोडक्शन धीमा कर दिया है.
EU Commission अब गैस की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए प्राइस कैप (Price Cap) पर विचार कर रहा है. इसके साथ ही लंबे समय की ऊर्जा जरूरतों के लिए 200 मिलियन यूरो की गारंटी के साथ छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर (SMRs) में निवेश की योजना भी बनाई जा रही है ताकि भविष्य में खाड़ी के तेल पर निर्भरता कम की जा सके.




