मिडिल ईस्ट में हालात काफी बिगड़ गए हैं। 1 अप्रैल 2026 को ईरान और हिज़्बुल्लाह ने मिलकर इज़राइल पर एक साथ बड़ा हमला किया है। इसमें मिसाइलें और ड्रोन इस्तेमाल किए गए हैं। इस तनाव का असर सिर्फ इज़राइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुवैत, बहरीन और कतर में भी इसके गंभीर निशान देखे गए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता वाली है क्योंकि तेल के टैंकरों और एयरपोर्ट के पास भी हमले की खबरें आई हैं।
हमले में कहां-कहां क्या नुकसान हुआ है?
ईरान के ड्रोन हमले की वजह से कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में भीषण आग लग गई है। कतर के समुद्री इलाके में कतर-एनर्जी के एक तेल टैंकर पर क्रूज मिसाइल से हमला किया गया। बहरीन में भी एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने की घटना सामने आई है। इज़राइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान में ईरान के बुनियादी ढांचे और बेरूत में हिज़्बुल्लाह के कमांडरों को निशाना बनाया है। दक्षिण लेबनान में हुई झड़पों में इज़राइल के चार सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है।
विभिन्न देशों की प्रतिक्रिया और मुख्य घटनाएं क्या हैं?
| देश/संगठन | मुख्य घटना/बयान |
|---|---|
| इज़राइल (IDF) | ईरान की मिसाइलों को रोकने का दावा किया और लेबनान सीमा पर सुरक्षा घेरा बढ़ाने की बात कही। |
| यमन (हूती) | ईरान और हिज़्बुल्लाह के साथ मिलकर इज़राइल के दक्षिण हिस्से पर हमला करने का दावा किया। |
| अमेरिका | इज़राइल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ शुरू किया है। |
| लेबनान सरकार | ईरानी राजदूत को देश से बाहर निकालने का फैसला लिया है। |
| यूरोपीय संघ (EU) | हिज़्बुल्लाह के हमलों की कड़ी निंदा की और तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है। |
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका की टेक कंपनियों को भी धमकी दी है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने क्षेत्र में मीडिया की आजादी और नागरिक अधिकारों पर पड़ रहे असर पर चिंता जाहिर की है। इज़राइल के रक्षा मंत्री ने लेबनान के सीमावर्ती इलाकों को नष्ट करने और वहां सुरक्षा क्षेत्र बनाने की योजना का ऐलान किया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लोग इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इससे विमान सेवाओं और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।