ईरान ने फिर दागा, UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन से हमला, इसराइल के कई शहरों में मची अफरातफरी
ईरान की सेना IRGC ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ का 91वां चरण शुरू कर दिया है। 3 अप्रैल 2026 को हुए इस बड़े हमले में खाड़ी देशों और इसराइल के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। इस हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत बढ़ गया है और कई देशों में हाई अलर्ट जारी है।
किन जगहों पर हुए हमले और क्या हुआ नुकसान?
ईरान की तरफ से किए गए इन हमलों में अमेरिका और इसराइल के कई सैन्य ठिकानों और औद्योगिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। इसमें भारी जान-माल के नुकसान की खबर सामने आ रही है।
| निशाने पर कौन | हमले की जगह और जानकारी |
|---|---|
| UAE (अबू धाबी) | अमेरिकी पायलटों और इंजीनियरों के ठिकाने पर मिसाइल हमला, भारी नुकसान की खबर। |
| कुवैत | अली अल सलेम एयरबेस और शुवैख पोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइलें गिरीं। |
| बहरीन | जबल अल दुखन में अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम को ड्रोन हमले में तबाह किया। |
| इसराइल | तेल अवीव और हाइफ़ा में भारी मिसाइलें गिरीं, 50 लाख लोग शेल्टर में छुपने को मजबूर हुए। |
| हिंद महासागर | अमेरिकी विमानवाहक पोत Abraham Lincoln पर चार क्रूज मिसाइलें दागी गईं। |
| F-35 जेट | ईरान के ऊपर एक और अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा। |
ईरान ने क्यों किए ये हमले और आगे क्या होगा?
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई 28 फरवरी को हुई आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई और अन्य सैन्य कर्मियों की हत्या का बदला है। IRGC की पब्लिक रिलेशन ऑफिस ने बयान जारी कर बताया कि यह ऑपरेशन ‘या अबा अब्दिल्लाह अल-हुसैन’ कोडनेम के तहत चलाया जा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके उद्योगों पर कोई भी हमला हुआ, तो वे इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इसरायली उद्योगों को पूरी तरह खत्म कर देंगे।
- Strait of Hormuz पर ईरान की सेना कड़ी निगरानी रख रही है।
- ईरान ने कहा है कि इस रास्ते में किसी भी तरह की असुरक्षा के लिए अमेरिका जिम्मेदार है।
- ब्रिगेडियर जनरल अली जहानशाही ने कहा है कि ईरान की धरती हमलावरों के लिए कब्रिस्तान साबित होगी।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस तनाव को लेकर शुक्रवार को वोटिंग होने की संभावना है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में आगे की सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों पर भी पड़ सकता है। युद्ध के हालात की वजह से उड़ानों और सामान्य जनजीवन में रुकावट आ सकती है। फिलहाल स्थिति बहुत ही नाजुक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है।




