ईरान ने इसराइल पर दागी मिसाइलों की दूसरी लहर, तेल अवीव में तबाही और खाड़ी देशों में भी बढ़ा तनाव.
ईरान और इसराइल के बीच चल रहा तनाव अब काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। 4 अप्रैल 2026 को ईरान ने इसराइल पर मिसाइलों की दूसरी लहर से बड़ा हमला किया है। इस हमले के कारण इसराइल के कई शहरों में भारी तबाही की खबरें आ रही हैं और आम लोगों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ा है। यह हमला सिर्फ इसराइल तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी वजह से खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है।
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मिसाइल हमलों से इसराइल में क्या नुकसान हुआ?
ईरान की मिसाइलें इसराइल के तेल अवीव से लेकर दक्षिण के नकब इलाके तक गिरी हैं। हमलों की वजह से कई जगहों पर भीषण आग लग गई है और बिजली की सप्लाई भी कट गई है।
- रामत गान में एक इमारत पूरी तरह गिर गई है।
- बेनी ब्रैक और पेतह टिकवा में मिसाइल गिरने से आग की घटनाएं सामने आई हैं।
- पिछले 24 घंटों में करीब 120 लोग घायल हुए हैं।
- इसराइल की सेना ने इसके जवाब में तेहरान में ईरान के मिसाइल रिसर्च और स्टोरेज सेंटरों पर हवाई हमले किए हैं।
खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों पर हमले का प्रभाव
ईरान के इस ताजा हमले का असर खाड़ी के कई देशों पर भी पड़ा है जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। हमलों की वजह से कुछ औद्योगिक इलाकों और जरूरी सेवाओं को नुकसान पहुंचा है।
| देश/क्षेत्र | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| कुवैत | पानी साफ करने वाले प्लांट और तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया |
| UAE (अबू धाबी) | अमीरात ग्लोबल एल्युमीनियम के कॉम्प्लेक्स को भारी नुकसान हुआ |
| बहरीन | ईरानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया, मलबे से लोग घायल हुए |
| इराक | सीमा पर हमलों के बाद शालमचेह बॉर्डर को बंद कर दिया गया |
| अमेरिका | दो लड़ाकू विमानों को गिराने का दावा, 13 सैनिकों की मौत हुई |
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
अमेरिका का कहना है कि ईरान के हमले अब पहले के मुकाबले कम प्रभावी हुए हैं लेकिन खुफिया जानकारी बताती है कि ईरान अपने तबाह हुए बंकरों को बहुत जल्दी दोबारा चालू करने में सक्षम है। तुर्की ने इस हमले का समर्थन नहीं करने की बात कही है और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इस सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत या युद्धविराम के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। फ्रांस और अन्य देश अब जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोलने के लिए योजना बना रहे हैं ताकि व्यापार प्रभावित न हो।




