ईरान-इसराइल युद्ध: पाकिस्तान और चीन ने दिया शांति का 5 सूत्री फार्मूला, अफ्रीकी संघ ने किया स्वागत.
ईरान और इसराइल के बीच जारी भारी जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान और चीन की एक नई पहल सामने आई है। अफ्रीकी संघ (African Union) ने पाकिस्तान और चीन के उस 5 सूत्री शांति प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसका मकसद इस युद्ध को बातचीत के जरिए खत्म करना है। यह युद्ध 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था और अब इसमें कई बड़े देश शामिल होते दिख रहे हैं। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध का असर सीधे तौर पर वहां की सुरक्षा और तेल सप्लाई पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान और चीन के 5 सूत्री शांति प्रस्ताव में क्या है खास?
पाकिस्तान और चीन ने मिलकर एक व्यापक ढांचा तैयार किया है ताकि युद्ध को शांत किया जा सके। इस प्रस्ताव में पांच मुख्य बातों को रखा गया है जो शांति के लिए जरूरी मानी जा रही हैं। इसमें सबसे पहले युद्ध को तुरंत रोकने और किसी भी तरह के तनाव को कम करने की बात कही गई है। इसके अलावा बातचीत को ही समाधान का इकलौता जरिया बताया गया है।
| क्रम संख्या | प्रस्ताव के मुख्य बिंदु |
|---|---|
| 1 | जंग को तुरंत रोकना और हिंसा को खत्म करना। |
| 2 | कूटनीति और बातचीत के जरिए शांति प्रक्रिया शुरू करना। |
| 3 | आम नागरिकों, बिजली, पानी और तेल ठिकानों की सुरक्षा। |
| 4 | होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही। |
| 5 | संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन और क्षेत्रीय शांति। |
जंग के ताज़ा हालात और खाड़ी देशों पर मंडराता खतरा
युद्ध के बीच ताजा घटनाक्रम काफी चिंताजनक हैं क्योंकि ईरान लगातार मिसाइल हमले कर रहा है। तेहरान और इस्फहान के पास बड़े धमाके सुने गए हैं और इसका असर अब कुवैत जैसे पड़ोसी देशों तक पहुंच गया है। कुवैत में एक तेल रिफाइनरी और पानी साफ करने वाले प्लांट पर मिसाइल और ड्रोन से हमले हुए हैं। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान पर आने वाले हफ्तों में और भी जोरदार हमले जारी रखेगी।
- ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने प्रतिबंध हटाने के बदले परमाणु कार्यक्रम सीमित करने का सुझाव दिया है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए फोर्स तैनात करने पर वोटिंग फिलहाल टल गई है।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ईरान द्वारा 12 साल के बच्चों को सेना में भर्ती करने की कोशिश को युद्ध अपराध बताया है।
- कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए तेल ठिकानों पर हमले चिंता का विषय बने हुए हैं।




