ईरान और इसराइल युद्ध के बीच खाड़ी देशों में भी गिरा मिसाइल का मलबा, कई लोग घायल और तेल रिफाइनरी में लगी आग.
ईरान और इसराइल के बीच चल रहे युद्ध को आज 35 दिन पूरे हो गए हैं। ताज़ा हमले में ईरान की मिसाइल का मलबा इसराइल के पेटाह टिकवा शहर में एक फैक्ट्री पर गिरा है जिससे काफी नुकसान हुआ है। इस युद्ध का असर अब सिर्फ इन दो देशों तक नहीं रहा बल्कि कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों में भी मिसाइलों के मलबे से नुकसान की खबरें आ रही हैं। अमेरिका और इसराइल की सेनाएं लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों और फैक्ट्रियों को निशाना बना रही हैं जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
इसराइल और खाड़ी देशों में कहां-कहां हुआ नुकसान?
मिसाइल हमलों और उनके मलबे की वजह से कई जगहों पर आग लगने और लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। कुवैत और यूएई में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि वहां की रिफाइनरी और गैस प्लांट को नुकसान पहुंचा है।
- इसराइल के पेटाह टिकवा में एक फैक्ट्री और गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
- कुवैत की दो तेल रिफाइनरी में ड्रोन हमले या मलबे की वजह से आग लग गई है।
- यूएई के हबशान गैस प्लांट में भी मलबे के गिरने से आग लगने की घटना हुई है।
- यूएई में मिसाइल के मलबे से कम से कम 12 लोग घायल हुए हैं।
- सऊदी अरब, कुवैत और यूएई के कई हिस्सों में सायरन बजने से लोगों में डर का माहौल है।
राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने क्या कहा?
युद्ध के बढ़ते असर को देखते हुए अमेरिका और इसराइल की तरफ से सख्त बयान जारी किए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वहां के पुलों और बिजली घरों को भी निशाना बनाया जाएगा। वहीं ईरान ने इन धमकियों को युद्ध अपराध बताया है।
| अधिकारी का नाम | मुख्य बयान और जानकारी |
|---|---|
| बेंजामिन नेतन्याहू | ईरान की 70% स्टील उत्पादन क्षमता को बर्बाद कर दिया गया है। |
| डोनाल्ड ट्रंप | अमेरिका के लक्ष्य पूरे होने वाले हैं, ईरान समझौता करे वरना बुरा होगा। |
| मसूद पेज़ेश्कियान | ईरान ने अमेरिकी धमकियों को युद्ध अपराध करार दिया है। |
| कानूनी विशेषज्ञ | 100 से ज्यादा विशेषज्ञों ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। |
इस संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस मामले में समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर मतदान करने की तैयारी में है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।




