ईरान में इंटरनेट पूरी तरह से ठप हो गया है और यह पाबंदी अब अपने 84वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इंटरनेट वॉचडॉग NetBlocks के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पिछले 1,992 घंटों से पूरी तरह बंद हैं। इस अभूतपूर्व ब्लैकआउट ने देश को दुनिया से अलग-थलग कर दिया है और इसे इतिहास का सबसे लंबा देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन माना जा रहा है। आम जनता से लेकर व्यापारियों तक सभी इस फैसले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
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ईरान सरकार का क्या है रुख और क्यों लगाया गया यह बैन?
ईरान सरकार की प्रवक्ता Fatemeh Mohajerani ने बताया है कि ये पाबंदियां अस्थायी हैं और सरकार इंटरनेट को नागरिकों का अधिकार मानती है। उन्होंने इस स्थिति को “युद्ध जैसी परिस्थितियां” बताया और कहा कि जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है। सुरक्षा संबंधी खतरे कम होने पर सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जाएंगी।
इस बीच सुप्रीम नेशनल Security काउंसिल ने ‘Pro Internet’ योजना को मंजूरी दी है। यह एक श्रेणीबद्ध एक्सेस मॉडल है जिसके तहत कुछ स्वीकृत व्यवसायों और लोगों को Telegram, WhatsApp और ChatGPT जैसे चुनिंदा प्लेटफॉर्म का सीमित इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इसके लिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है और YouTube जैसी प्रमुख सेवाएं अब भी पूरी तरह ब्लॉक हैं।
मंत्रियों के बीच छिड़ी बहस और ब्लैक मार्केट का बढ़ता असर
इंटरनेट शटडाउन को लेकर ईरान के सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इंटरनेट नीतियों की समीक्षा के लिए एक विशेष मुख्यालय का गठन किया है, जिसकी अगुवाई उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref कर रहे हैं। वहीं, देश के संचार मंत्री Sattar Hashemi का कहना है कि हर नागरिक को अच्छे इंटरनेट का अधिकार है और किसी भी प्रकार का ‘व्हाइटलिस्ट’ या ‘टियर इंटरनेट’ सिस्टम मान्य नहीं होना चाहिए।
दूसरी तरफ, देश के चीफ जस्टिस Gholam-Hossein Mohseni-Ejei ने ब्लैक मार्केट में गैर-कानूनी रूप से बिकने वाले ‘Internet Pro’ सिम कार्ड के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विज्ञान और अनुसंधान मंत्री Hossein Simaei Saraf ने चिंता जताई है कि इस पाबंदी से देश के वैज्ञानिक और शैक्षिक कार्यों को नुकसान पहुंच रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है।
‘Information Black Hole’ और Starlink पर कार्रवाई की कोशिश
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों जैसे Committee to Protect Journalists (CPJ) और Reporters Without Borders (RSF) ने ईरान में बनी इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि इस 84 दिनों के ब्लैकआउट से देश में एक तरह का ‘इन्फर्मेशन ब्लैक होल’ बन गया है, जिसका इस्तेमाल स्वतंत्र मीडिया की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।
ईरान के नागरिक अब महंगे VPN और अन्य माध्यमों के सहारे सोशल मीडिया और जरूरी नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी Starlink सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन को भी रोकने की कोशिशों में लगे हैं, जिसका इस्तेमाल लोग इस पाबंदी को बायपास करने के लिए कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान में देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन कब और क्यों शुरू हुआ था?
ईरान में बड़े पैमाने पर इंटरनेट व्यवधान 8 जनवरी 2026 को देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान शुरू हुआ था। इसके बाद, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद इसे और अधिक सख्त कर दिया गया।
ईरान सरकार का ‘Pro Internet’ प्लान क्या है?
यह ईरान की सुप्रीम नेशनल Security काउंसिल द्वारा मंजूर किया गया एक सीमित इंटरनेट मॉडल है। इसके जरिए केवल स्वीकृत लोगों और कंपनियों को ही Telegram और WhatsApp जैसी ऐप इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है, लेकिन इसके लिए उन्हें अधिक पैसे देने पड़ते हैं।
इस इंटरनेट ब्लैकआउट को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने क्या चेतावनी दी है?
CPJ और RSF जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि ईरान सरकार इस ब्लैकआउट का उपयोग स्वतंत्र मीडिया और पत्रकारों की आवाज को दबाने के लिए कर रही है, जिससे देश में सूचनाओं का अकाल पड़ गया है।
