Iran Navy Chief Warning: ईरान के युद्धपोत को अमेरिका ने डुबोया, 87 सैनिकों की मौत के बाद तेहरान ने दी घातक बदले की चेतावनी
हिंद महासागर में श्रीलंकाई तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को हमला कर समुद्र में डुबो दिया है। इस हमले में ईरान के 87 नौसैनिकों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य सैनिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। ईरान के सैन्य नेतृत्व ने इस घटना को एक युद्ध अपराध बताया है और अमेरिका को चेतावनी दी है कि इस हमले का घातक बदला लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर 32 जीवित बचे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।
कैसे और कहां हुआ यह भीषण हमला?
यह घटना 4 मार्च 2026 को सुबह लगभग 05:08 बजे श्रीलंका के गाले तट से करीब 35-40 किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय पानी में हुई। अमेरिकी नौसेना की लॉस एंजिल्स-क्लास पनडुब्बी USS Charlotte ने ईरानी फ्रिगेट पर दो Mark 48 टॉरपीडो दागे थे। इनमें से एक टॉरपीडो जहाज पर सटीक लगा, जिसके कारण IRIS Dena मात्र 2 से 3 मिनट के भीतर ही समुद्र में समा गया। उस समय जहाज पर 136 से 180 के बीच चालक दल के सदस्य सवार थे।
घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और आंकड़े
श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने संकट का संदेश मिलते ही सबसे पहले बचाव अभियान शुरू किया था। बाद में भारतीय नौसेना ने भी अपने P-8I समुद्री गश्ती विमान और जहाजों को मदद के लिए भेजा। घटना की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|
| पुष्टि की गई मौतें | 87 नौसैनिक |
| बचाए गए लोग | 32 नौसैनिक |
| लापता सदस्य | 20 से 61 के बीच |
| इलाज का स्थान | करापिटिया अस्पताल, गाले |
| हमलावर पनडुब्बी | USS Charlotte (USA) |
ईरान और अमेरिका का आधिकारिक बयान
ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल आमिर हातमी ने कहा है कि नौसैनिकों की हत्या का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाज एक शांतिपूर्ण मिशन से लौट रहा था और यह हमला पूरी तरह से उकसावे वाली कार्रवाई है। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हमले को एक वैध सैन्य लक्ष्य के खिलाफ कार्रवाई बताया है। ईरान ने अमेरिका पर जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगाया है और कहा है कि इस घटना ने हिंद महासागर में सुरक्षा की स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।




