ईरान के परमाणु प्लांट पर इज़राइल का बड़ा हमला, UN ने पुष्टि की कि अब काम नहीं कर रहा है प्लांट
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA ने पुष्टि की है कि ईरान का खोंडाब (Khondab) भारी पानी उत्पादन संयंत्र अब काम नहीं कर रहा है। 27 मार्च 2026 को हुए इज़राइली हवाई हमले में इस प्लांट को गंभीर नुकसान पहुँचा है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हमले के समय इस केंद्र में कोई घोषित परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी।
IAEA की रिपोर्ट और प्लांट की मौजूदा स्थिति
IAEA ने सैटेलाइट तस्वीरों और अपनी तकनीकी जानकारी के आधार पर यह आकलन पेश किया है। संस्था के अनुसार खोंडाब प्लांट अब पूरी तरह से ठप हो गया है और वहां से उत्पादन संभव नहीं है। यह प्लांट ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था।
- हमले की तारीख: शुक्रवार, 27 मार्च 2026
- पुष्टि का समय: IAEA ने रविवार और सोमवार को इसकी जानकारी साझा की
- नुकसान का स्तर: संयंत्र का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है
- सुरक्षा स्थिति: परमाणु सामग्री न होने से रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा नहीं है
इज़राइल और ईरान का आधिकारिक रुख क्या है?
इज़राइली सेना (IDF) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे ऑपरेशन ‘Rising Lion’ का हिस्सा बताया है। इज़राइल का कहना है कि यह प्लांट परमाणु हथियार बनाने के लिए प्लूटोनियम उत्पादन का केंद्र था। वहीं ईरान ने इस हमले को एक बड़ा अपराध बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
| पक्ष | मुख्य बयान और जानकारी |
|---|---|
| इज़राइल (IDF) | परमाणु हथियारों को रोकने के लिए खुफिया जानकारी पर हमला किया गया। |
| ईरान | विदेशी मंत्री ने कहा कि इज़राइल को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। |
| IAEA | स्वतंत्र विश्लेषण के बाद प्लांट के ‘नॉन-ऑपरेशनल’ होने की पुष्टि की गई। |
| क्षेत्रीय असर | तेहरान सहित कई इलाकों में बिजली और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा है। |
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते इस सीधे टकराव ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। पिछले कुछ हफ़्तों से चल रहे इन हवाई हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और हवाई यात्रा प्रभावित होने की आशंका है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा बिगड़ने से काम और आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।




