ईरान के परमाणु प्लांट पर हमले का खतरा, दुबई और कुवैत समेत खाड़ी देशों में रेडिएशन फैलने की चेतावनी
ईरान के बुशहर परमाणु प्लांट पर हमले की आशंका ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल बना दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर इजरायल या अमेरिका की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई होती है, तो इससे निकलने वाला रेडिएशन ईरान की सीमाओं को पार कर जाएगा। इससे खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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परमाणु प्लांट पर हमले से किन देशों को सबसे ज्यादा खतरा है?
बुशहर परमाणु प्लांट में इस समय 72 टन ईंधन और 210 टन इस्तेमाल किया हुआ ईंधन मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हमले की स्थिति में यह रेडियोधर्मी पदार्थ पूरे फारस की खाड़ी में फैल सकते हैं। इसका सबसे बुरा असर इन देशों पर होने की आशंका है:
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- कुवैत
- कतर
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम क्या हैं?
रूसी एजेंसी Rosatom ने प्लांट के यूनिट 2 और 3 का निर्माण फिलहाल रोक दिया है। सुरक्षा कारणों से लगभग 100 कर्मचारियों को वहां से निकाल लिया गया है। हालांकि, लगभग 600 रूसी विशेषज्ञ अभी भी प्लांट के अंदर मौजूद हैं ताकि किसी भी तरह के मेल्टडाउन को रोका जा सके। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी अपना इमरजेंसी सेंटर एक्टिव कर दिया है और आसपास के देशों में रेडिएशन की निगरानी की जा रही है।
खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों में भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी रहती है। अगर रेडिएशन हवा के जरिए इन देशों तक पहुंचता है, तो यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी तक प्लांट पर किसी सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आसपास के इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और IAEA ने अपील की है कि परमाणु ठिकानों को युद्ध से दूर रखा जाना चाहिए।




