ईरान ने अमेरिका को दी सीधी चेतावनी, सीजफायर उल्लंघन का चुकाना होगा भारी दाम, लेबनान हमले पर भड़का तेहरान
9 अप्रैल 2026 को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक बड़ा बयान जारी किया है. उन्होंने कहा कि सीजफायर के नियमों को तोड़ना अब अमेरिका और इसराइल को महंगा पड़ेगा. गालिबाफ के मुताबिक शांति समझौते का उल्लंघन करने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा और अब इस तनाव को रोकने की सख्त जरूरत है. तेहरान की ओर से यह बयान उस समय आया है जब क्षेत्र में युद्ध की स्थिति फिर से गंभीर होती दिख रही है.
ईरान ने किन बातों पर दर्ज कराया है अपना कड़ा विरोध?
ईरानी अधिकारियों ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी नाराजगी जताई है जो नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| विषय | ईरान का मुख्य आरोप |
|---|---|
| लेबनान सीजफायर | इसराइल ने लेबनान में हमले जारी रखे जो समझौते के खिलाफ है |
| हवाई सीमा उल्लंघन | ईरान के लार शहर (फर्स प्रांत) में एक ड्रोन घुसने की खबर |
| यूरेनियम अधिकार | ईरान को यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से मना किया जा रहा है |
| समझौते की शर्तें | अमेरिका ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव की तीन मुख्य शर्तें तोड़ी हैं |
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका को अब फैसला करना होगा कि वह सीजफायर चाहता है या इसराइल के जरिए युद्ध जारी रखना चाहता है. उन्होंने साफ किया कि दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं.
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?
ईरान और इसराइल के बीच बढ़ता यह तनाव खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है. ईरान द्वारा जलमार्ग के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘Strait of Hormuz’ को बंद करने की खबरों से तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है. अगर तनाव इसी तरह बढ़ा तो खाड़ी देशों में व्यापार और नौकरियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है.
- 9 अप्रैल 2026 को बेरूत में भीषण हवाई हमले हुए जिससे तनाव काफी बढ़ गया है.
- ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने यूरेनियम संवर्धन को बातचीत के लिए जरूरी बताया है.
- व्हाइट हाउस ने यूरेनियम संवर्धन को ‘रेड लाइन’ बताते हुए समझौता करने से इनकार कर दिया है.
- अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत प्रस्तावित है जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं.




