ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला होगा युद्ध अपराध, अमेरिकी एक्सपर्ट ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का दिया हवाला
ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। IRNA न्यूज़ एजेंसी की एक हालिया रिपोर्ट में अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माने जा सकते हैं। यह बयान उन धमकियों और तनाव के बीच आया है जिसमें नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी जिससे आम जनता की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और बिजली संयंत्रों की सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली घर और पानी की सप्लाई वाले प्लांट, को युद्ध के दौरान विशेष सुरक्षा दी गई है। इन कानूनों के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों के लिए जरूरी ठिकानों पर हमला करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- जेनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 147 के अनुसार, सैन्य जरूरत के बिना संपत्ति का भारी विनाश एक गंभीर अपराध है।
- परमाणु बिजली घरों को विशेष सुरक्षा प्राप्त है और किसी भी स्थिति में उन्हें निशाना बनाना कानूनी रूप से गलत है।
- यदि किसी हमले से नागरिकों को होने वाला नुकसान सैन्य लाभ से बहुत ज्यादा है, तो वह हमला गैर-कानूनी माना जाता है।
मानवाधिकार संस्थाओं और विशेषज्ञों की बड़ी बातें
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। एम्नेस्टी इंटरनेशनल की रिसर्च डायरेक्टर एरिका ग्वेरा-रोसस ने कहा है कि बिजली घरों पर हमले की धमकियां लाखों नागरिकों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के कार्यकारी निदेशक फिलिप बोलोपियन ने भी विभिन्न नेताओं द्वारा दी जा रही धमकियों पर चिंता जाहिर की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित दुनिया की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।
खाड़ी क्षेत्र और आम जनता पर होने वाला असर
ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा ठिकानों को लेकर हो रही बयानबाजी का असर खाड़ी क्षेत्र (GCC) में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। इन ठिकानों पर हमला न केवल युद्ध को बढ़ावा देगा, बल्कि वहां काम करने वाले लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार के लिए भी संकट पैदा कर सकता है। ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने से पूरे क्षेत्र में बिजली संकट और आर्थिक अस्थिरता आने का खतरा बना रहता है, जिससे हर आम और खास आदमी प्रभावित होता है।




