ईरान के राष्ट्रपति ने युद्ध रोकने की जताई इच्छा, शांति के लिए रखी बड़ी शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को खत्म करने की इच्छा जाहिर की है। 31 मार्च 2026 को यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान शांति चाहता है। हालांकि, राष्ट्रपति ने साफ किया है कि युद्ध रोकने के लिए उन्हें इस बात की गारंटी चाहिए कि उनके देश पर दोबारा हमले नहीं होंगे। ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
शांति समझौते के लिए ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं?
ईरान के राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध खत्म करने का कोई भी फैसला ईरानी जनता के हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। उन्होंने अपनी मांगों में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
- ईरान को भविष्य में किसी भी बाहरी हमले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी चाहिए।
- क्षेत्र में मौजूद US सैन्य अड्डों का ईरान के खिलाफ इस्तेमाल पूरी तरह बंद होना चाहिए।
- ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए और हुए नुकसान की भरपाई की जाए।
- बिना सुरक्षा गारंटी के युद्ध रोकने की किसी भी बातचीत को राष्ट्रपति ने अर्थहीन बताया है।
मौजूदा हालात और हालिया घटनाओं का विवरण
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान के बाद हुई थी। पिछले 24 घंटों में कई बड़ी घटनाएं हुई हैं जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
| तारीख | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 31 मार्च 2026 | सऊदी अरब ने एक बैलिस्टिक मिसाइल और 10 ड्रोनों को हवा में मार गिराया। |
| 31 मार्च 2026 | दुबई के पास एक कुवैती तेल टैंकर अल-सलमी पर हमला होने की खबर आई। |
| 31 मार्च 2026 | ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने टेक और फाइनेंस कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। |
| 31 मार्च 2026 | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल केंद्रों पर हमले की चेतावनी दी। |
बाजार और प्रवासियों पर इस खबर का क्या असर होगा?
ईरान के राष्ट्रपति द्वारा शांति की इच्छा जताने के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। अमेरिका के S&P 500 और नैस्डैक जैसे शेयर बाजार इस खबर के बाद ऊपर चढ़े हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है, क्योंकि युद्ध की स्थिति में तेल की कीमतें और हवाई यात्रा पर बुरा असर पड़ता है। पाकिस्तान और चीन भी इस मामले में कूटनीतिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो सके। इजराइल ने भी सुरक्षा कारणों से लेबनान के अंदर एक बफर जोन बनाने की घोषणा की है।




