Iran का बड़ा बयान, बातचीत के लिए तैयार लेकिन शर्तें रहेंगी, अमेरिका के रवैये पर जताई नाराजगी
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने साफ कर दिया है कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह केवल सिद्धांतों और तर्क के आधार पर ही होगा। यह बयान इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत के नाकाम होने के बाद आया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस मीटिंग में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया था।
इस्लामाबाद में बातचीत क्यों रही नाकाम?
11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस मीटिंग का नेतृत्व ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance ने किया था। चर्चा के दौरान कई अहम मुद्दों पर बात हुई, लेकिन अंत में कोई सहमति नहीं बन पाई।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| चर्चा के विषय | होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध मुआवजा और प्रतिबंध हटाना |
| नाकामी का कारण (US) | ईरान का परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता न देना |
| नाकामी का कारण (Iran) | अमेरिका का घमंडी रवैया और बातचीत का गलत तरीका |
ईरान की सेना और वर्तमान स्थिति क्या है?
न्यायपालिका प्रमुख Gholam-Hossein Mohseni Ejei ने कहा कि अमेरिका और इसराइल के खिलाफ 40 दिनों के युद्ध के बाद दुश्मन अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सके। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की सेना पूरी तरह अलर्ट है और सैनिकों की उंगली ट्रिगर पर है। फिलहाल एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन सैन्य तैयारी में कोई कमी नहीं आई है।
ईरान सरकार का कहना है कि उनके राजनयिक और सरकारी अधिकारी ‘तीसरे रक्षा युद्ध’ की उपलब्धियों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संसद अध्यक्ष Ghalibaf के अनुसार, अमेरिका अब ईरान के सिद्धांतों को समझ चुका है और उसे यह तय करना होगा कि वह ईरान का भरोसा जीत सकता है या नहीं।




